Sunday, July 21, 2024
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अकीदत के साथ मनाया गया हजरत अली का जन्मदिन

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प्रतापगढ़

अंजुमन रजा ए हुसैन चैरिटेबल ट्रस्ट व मरियम इस्लाम मेमोरियल ट्रस्ट के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने हर साल की तरह इस साल भी बड़ी अकीदत व मोहब्बत हेतराम के साथ इस्लाम धर्म के चौथे खलीफा हजरत मौला अली शेरे खुदा का जन्मदिन मनाया गया और मजलिस मिलाद का आयोजन किया गया!
कमेटी अध्यक्ष आबिद रजा हशमति ने बताया कि 17 मार्च सन 600 में(13 रजब इस्लामिक कैलेंडर का सातवां महीना) हजरत अली इस दुनिया में तशरीफ लाए इन की पैदाइश को लेकर एक किस्सा बहुत मशहूर हुआ बताया जाता है कि जब हजरत अली दुनिया में तशरीफ लाने वाले थे तब इनकी मां फ़ातिमा बिंते असद मक्का में काबे की तरफ यह कहती हुई जा रही थी अल्लाह मुझे तुझ पे यकीन है और तेरे नबी हजरत इब्राहिम पर यकीन है जिन्होंने तेरे हुक्म पर इस घर काबा शरीफ की नींव रखी अल्लाह तुझे उसी पैगंबर की कसम मेरे बच्चे की पैदाइश को आसान बना दे यह कहती हुई हज़रत फ़ातिमा बिंते असद काबे के पास पहुंची काबे शरीफ के गेट पर ताला लगा था काबे की दीवार खुद-ब-खुद फट गई हज़रत फ़ातिमा बिंते असद अकेली काबे के अंदर दाखिल हो गए दीवार आपस में जुड़ गई इसी तरह हजरत अली की पैदाइश काबा शरीफ के अंदर हुई जब लोगों में शोर हुआ कि हज़रत फ़ातिमा बिंते असद काबे के अंदर है तो काबे की गेट को खोला गया इसी क्रम में बाबा रशीद अहमद कुरेशी साहब ने बताया कि हजरत अली पैग़ंबरे इस्लाम के दामाद हैं और हजरत अली ने कई इस्लामिक जंगे लड़ी और फतेह की उनकी बहादुरी के बारे में बताया जाता है कि खैबर की जंग में एक दरवाजा ऐसा था जिसे बहुत सारे लोग मिलकर बंद करते थे मगर आपने उस दरवाजे को अकेले उखाड़ दिया और उसी दरवाजे को अपनी ढाल की तरह इस्तेमाल किया और अकेले जंग जीत ली इस तरह आपके बहादुरी के बहुत सारे किस्से मशहूर हैं इसी क्रम में बाबा रशीद अहमद ने देश में अमन चैन की दुआ की तथा कर्बला में अकीदत के फूल पेश किए गए लोगों में लंगर मिठाई सबील बांटी गई
इस मजलिस मिलाद के मौके पर सरवर राइन, मुख्तार राइन मोहम्मद यूसुफ, इजहार हुसैन, गुड्डू हाफिज, एजाज आसिफ अली, मुस्तफा महफूज हसन ,इरशाद पठान गुलाम रजा हशमतती, मोहम्मद अकरम, मोहम्मद इकबाल, मोहम्मद कमाल, बिलाल रजा, सकलेन रजा ,हशमती अफजल सिद्दीकी मोहम्मद इदरीश मेराज आलम, मेहताब अहमद साबरी सफीक अंसारी मोहम्मद इमरान सानू गुलाम कौशर मोहम्मद चांद सद्दाम एहसान शराफत फरोग अहमद हजरत रेहमानी मियां बिलाल रहमानी इत्यादि लोग मौजूद रहे मजलिस मिलाद का संचालन गुलाम रजा हशमती साहब ने किया !