Sunday, July 21, 2024
कविता

काका हाथरसी के व्यंग्य बाण

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काका हाथरसी आज भी अपनी रचनाओं के जरिए लोगों के दिलों में जिंदा है, आईए, आपको भी रू-ब-रू कराते हैं काका हाथरसी की समाज पर कटाक्ष करती कुछ मशहूर वंयग्य-रचनाओं से – 

सारे जहाँ से अच्छा…

सारे जहाँ से अच्छा है इंडिया हमारा
हम भेड़-बकरी इसके यह ग्वारिया हमारा
सत्ता की खुमारी में, आज़ादी सो रही है
हड़ताल क्यों है इसकी पड़ताल हो रही है
लेकर के कर्ज़ खाओ यह फर्ज़ है तुम्हारा
सारे जहाँ से अच्छा …….

चोरों व घूसखोरों पर नोट बरसते हैं
ईमान के मुसाफिर राशन को तरशते हैं
वोटर से वोट लेकर वे कर गए किनारा
सारे जहाँ से अच्छा …….

हिन्दी के भक्त हैं हम, जनता को यह जताते
लेकिन सुपुत्र अपना कांवेंट में पढ़ाते
बन जाएगा कलक्टर देगा हमें सहारा
सारे जहाँ से अच्छा …….