Sunday, July 21, 2024
अपराध

कुंवरदा के एक गरीब किसान का पूराना पुश्तैनी मड़हा गिराकर दबंगों द्वारा अवैध रास्ते की मांग

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जौनपुर – नगर के लाइनबाजार थाना क्षेत्र के कुंवरदा के एक गरीब किसान बिहारी लाल यादव पुत्र स्व.रामदेव यादव साकिन मौजा कुंवरदा थाना लाइनबाजार का पुराना व पुश्तैनी मड़हा दिनांक 15/06/2017 में जबरदस्ती बिहारी लाल यादव को मारपीट कर दबंग व मनबड़ पड़ोसियों द्वारा गिरा कर अवैध रास्ते को निकालने का भरसक प्रयास किया गया। मनबड़ व दबंग किस्म के पड़ोसियों की दबंगई की लिखित प्रार्थना पत्र बिहारी लाल यादव द्वारा जौनपुर जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को किया गया जिसके बाद पुलिस अधीक्षक ने थाना लाइनबाजार से मौके पर तत्काल जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया। पुलिस अधीक्षक के आदेशानुसार थाना लाइनबाजार पुलिस ने राजस्व टीम की मदद से मौके पर पहुंच बिहारी लाल यादव का पुराना व पुश्तैनी मड़हा गिराकर अवैध रुप से रास्ता निकालने के सम्बन्ध में जांच कर दिनांक 18/01/2018 को थाना लाइनबाजार के जांच अधिकारी एस.आई.अनिल कुमार मिश्रा ने अपनी रिपोर्ट में बिहारी लाल यादव का पुराना व पुश्तैनी मड़हा होना बताया और दबंग व मनबड़ पड़ोसियों द्वारा पुराना व पुश्तैनी मड़हे को गिराकर अवैध तरीके से रास्ता निकालने के सम्बन्ध में जांच अधिकारी ने बताया कि ग्राम कुंवरदा की आराजी न0 489 राजस्व अभिलेख में आबादी श्रेणी”6 (2) खाते की भूमि हैं जिसमें बिहारी लाल यादव का पुराना व पुश्तैनी मड़हा था जिसे दबंग व मनबड़ पड़ोसियों द्वारा मड़हे को गिराकर अवैध रास्ते की मांग की जा रही हैं। जबकि जो पूरी तरह गलत मांग हैं क्योंकि बिहारी लाल यादव के मड़हे से पश्चिम दिशा से सटकर लगभग 7.5 फिट चौड़ा रास्ता पड़ोसियों के मकान तक जाता हैं ऐसी दशा में पड़ोसियों द्वारा बिहारी लाल यादव का पुश्तैनी व पुराने मड़हा को गिराकर दूसरे व नये रास्ते की मांग करना बिल्कुल बेबुनियाद है।बिहारी लाल यादव के दबंग व मनबड़ पड़ोसियों के द्वारा गुंडागर्दी करके पुराना व पुश्तैनी मड़हा गिराकर अवैध रास्ते के निर्माण में उन दबंग पड़ोसियों के खिलाफ लाइनबाजार थाना में मु0अ0स0 71/17 धारा 427/323/504/आईपीसी का मुकदमा पंजीकृत हुआ। जिसके बाद बिहारी लाल यादव ने अपने पुराने पुश्तैनी मड़हे पर दिवाल बनवाया किन्तु दबंग व मनबड़ पड़ोसियों द्वारा बिहारी लाल यादव की दिवाल को गिरा दिया,दिवाल गिराने के समबंध में लाइनबाजार थाने पर उन दबंग व मनबड़ पड़ोसियों के उपर पुनः दूबारा मु0अ0स0 285/19 धारा 147/323/504/506/427/आईपीसी का मुकदमा दर्ज किया गया। उक्त जमीन की पैमाइश हेतु राजस्व विभाग की टीम के जाने पर बिहारी लाल यादव के दबंग व मनबड़ पड़ोसियों ने राजस्व लेखपाल के साथ भी अभद्रता व्यवहार किया,जिसके बाद राजस्व लेखपाल द्वारा दिनांक 31/05/2019 को मु0अ0स0285/19 धारा 332/353/504/506 आईपीसी का मुकदमा दबंग पड़ोसी जवाहर लाल यादव के विरुद्ध दर्ज कराया गया।

राजस्व विभाग की जांच में गिराये गए मड़हे की जमीन को बिहारी लाल यादव का बताया गया जबकि दबंग व मनबड़ पड़ोसियों द्वारा मड़हा निर्माण करने में पड़ोसियों द्वारा अवैध रुप से रोका जा रहा हैं।

बिहारी लाल यादव के दबंग व मनबड़ पड़ोसियों का कंधरपुर गांव के कुछ और लोगों से विवाद रहा है जिसमें जवाहिर यादव,रामजीत यादव,हीरालाल पर पहले से धारा 304/34, 504, 506 भारतीय दण्ड संहिता में पंजीकृत हैं। जिसमें इन तीनों दबंग व मनबड़ पड़ोसियों पर चार वर्ष की सश्रम कारावास तथा पाँच हजार रुपए का अर्थदण्ड लगाया गया हैं। जिससें यह स्पष्ट होता है कि बिहारी लाल यादव के दबंग व मनबड़ पड़ोसी अपराधी किस्म के व्यक्ति है।

बिहारी लाल यादव के दबंग पड़ोसियों की दबंगई इस कदर बढ़ गई है कि आये दिन किसी न किसी पड़ोसियों से मारपीट फौजदारी करना इन दबंगों के लिए आम बात हो गई है जिनके दिल में पुलिस का कोई डर खौफ नहीं है।
पड़ोसियों द्वारा क्षुब्ध होकर पुनः बिहारी लाल यादव दिनांक 03/09/2020 को समाधान दिवस पर पहुच कर अपने दबंग पड़ोसियों की दबंगई के खिलाफ लिखित प्रार्थना पत्र दे गुहार लगाने पहुंचे थाने पर वहा मौजूद नगर मजिस्ट्रेट सहदेव मिश्रा ने एसएचओ लाइनबाजार को लिखित आदेशित किया की राजस्व व पुलिस की संयुक्त टीम मौका व अभिलेख की जांच कर सुलह समझौते से समस्या हल कराए व सिविल अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण न होने पाए,अब देखना यह है कि बिहारी लाल यादव को अपने पुराने पुस्तैनी मड़हा को उस स्थान पर पुनः स्थापित करने में जिला प्रशासन उनकी क्या और कैसी मदद करता हैं? सबसे बड़ी हैरत की बात यह है कि बिहारी लाल यादव का अपनी जमीन पर पुराना पुस्तैनी मड़हा उनके दबंग पड़ोसियों द्वारा गिराने के बाद पुलिस अधीक्षक व थाना प्रभारी एवं जिले की राजस्व विभाग से पूर्ण सहयोग मिलने के बाद भी गरीब किसान बिहरी लाल यादव अपनी जमीन पर अपना मड़हा नहीं डाल पा रहे हैं आखिर सवाल यह उठता है कि जब प्रशासन से न्याय मिलने के बाद भी गरीब अपनी जान के डर से अपनी जमीन पर एक ईटा नहीं रख सकता है तो ऐसे न्याय का क्या मतलब।

गरीब किसान बिहारी लाल यादव आज भी अपनी जान माल की रक्षा के साथ अपनी जमीन को पाने की चाह में दर दर भटकने को है मजबूर?