Sunday, July 21, 2024
स्वास्थ्य

कोरोनावायरस संक्रमण दूसरी लहर में ब्लैक फंगस नाम की बीमारी के रूप में लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है

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कोरोनावायरस संक्रमण के इस दूसरी लहर में वर्तमान में एक गंभीर मोड़ सामने नजर आ रहा है जो ब्लैक फंगस नाम की बीमारी के रूप में लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। इस संबंध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जौनपुर के सदस्यों विशेषतयः इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जौनपुर के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेत्र रोग सर्जन डॉ एनके सिंह, न्यूरो सर्जरी विशेषज्ञ डॉ शशी प्रताप सिंह, त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉक्टर जी एस यादव, डॉ बीके यादव एवं डॉ आरपी गुप्ता, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ एचडी सिंह, वरिष्ठ फिजीशियन एवं हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ बीएस उपाध्याय, डॉ ए के मिश्रा, IPP तथा वरिष्ठ बाल रोग कार्डियोलॉजिस्ट डॉ क्षितिज शर्मा, वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ डॉ आर पी यादव व डॉ आर ए मौर्य, वरिष्ठ सर्जन डॉ रजनीश श्रीवास्तव इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जौनपुर के सचिव एवं वरिष्ठ सर्जन डॉक्टर ए ए जाफरी तथा अन्य सदस्यों ने जनता की जागरूकता के लिए आपसी सहमति से चंद बातें शेयर की है। वैसे तो कोरोना संक्रमण में गंभीर रोग लगभग 5% से कम ही रहता है एवम मृत्यु दर भी बहुत कम है, किंतु ऐसे रोगी जो कुछ विशेष परिस्थितियों से गुजर रहे हो, उनमें ब्लैक फंगस नामी रोग के होने की काफी संभावना रहती है। एक बार ब्लैक फंगस अर्थात म्यूकरर्माइकोसिस नामक रोग के हो जाने के बाद इस रोग की गंभीरता अत्यधिक बढ़ जाती है एवं इसमें मृत्यु दर भी बहुत अधिक हो जाती है। ऐसे रोगी जो डायबिटीज से पीड़ित हैं एवं जिनकी शुगर कंट्रोल नहीं होती है, वे रोगी जो कोरोना संक्रमण के इलाज के दौरान ऑक्सीजन पर रहे हो या जिनको स्टिराइड दिया गया हो, वे रोगी जो किसी भी रोग के इलाज के लिए इम्यूनोमोड्यूलेटर्स दवाओं का उपयोग कर रहे हो, इन रोगियों में म्यूकरमाइकोसिस अथवा ब्लैक फंगस रोग के होने की संभावना अधिक होती है। साधारणतया ब्लैक फंगस साइनसेस, मस्तिष्क, नेत्र, फेफड़े, त्वचा तथा आंत्र व अमाशय आदि को प्रभावित करता है। अतः म्यूकरर्माइकोसिस सामान्यतः चार प्रकार के कहे जा सकते हैं, आर्बिटो न्यूरोलॉजिकल म्यूकरमायकोशिश, क्यूटेनियस म्यूकरमाइकोसिस, पलमोनरी म्यूकारमायइकोसिस तथा गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल म्यूकरमाइकोसिस। इन चारों प्रकार के रोगों का लक्षण भिन्न-भिन्न होता है। आर्बिटो न्यूरोलॉजिकल म्यूकार्माइकोसिस में चेहरे के एक तरफ सूजन अथवा दर्द हो सकता है, आंखों में दर्द हो सकता है अथवा आंखें लाल हो सकती है, दांत में दर्द हो सकता है, नाक से रक्त युक्त म्यूकस निकल सकती है, सर में दर्द हो सकता है। इसी प्रकार पलमोनरी म्यूकरर्माइकोसिस में बुखार आना, सीने में दर्द होना, सांस लेने में कठिनाई होना, सांस फूलना आदि लक्षण होते हैं। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल म्यूकरमायकोसिस में सामान्यतया लक्षण पेट से संबंधित होते हैं, जिसमें दस्त होना, पेट में दर्द होना, बुखार आना आदि हो सकता है। क्यूटेनेयस म्यूकरर्माइकोसिस में लक्षण त्वचा से संबंधित दिखाई देते हैं, जिसमें लाल या काला धब्बा पढ़ना, छाला पड़ना, त्वचा में कहीं पर दर्द या सूजन महसूस होना, सुन पन महसूस होना आदि इसके लक्षण हैं। उपरोक्त किसी भी प्रकार के लक्षण आने पर इस रोग को अति गंभीरता से लेते हुए तुरंत किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लेने की आवश्यकता होती है। जितनी जल्दी इसका इलाज शुरू हो जाए उतना अधिक लाभ मिलने की संभावना होती है। देरी करने पर इस रोग में मृत्यु दर 60 से 80% तक हो सकती है। इस रोग की दवा स्वयं या दोस्तों के सलाह से कभी न लें। स्टेरॉयड आदि का उपयोग भी स्वयं न करें। यह रोग आमतौर से बहुत ही कम होने वाला rare रोग है। अतः इसकी दवाएं महंगी भी है और अधिक सुलभ भी नहीं है। विशेषज्ञ चिकित्सक इस संबंध में जांच एवं अत्याधुनिक इलाज जो उपलब्ध है, शुरू करवा देते हैं। जिससे समुचित इलाज उपलब्ध होने पर रोग में फायदा होने की संभावना बहुत अधिक होती है। इस रोग से बचने के वही उपाय हैं जो कोरोनावायरस संक्रमण से बचने के लिए हैं, अर्थात भीड़ भाड़ में जाने से बच के रहना, घर से बहुत आवश्यक होने पर ही निकलना, घर से बाहर निकलने के समय मास्क अवश्य लगाएं रहना, सामाजिक दूरी लगभग 6 गज की बनाए रखना और समय-समय पर हाथ धोना अथवा सैनिटाइजेशन करते रहना है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जौनपुर के सदस्यों ने जनता से आवाहन किया है कि इस रोग के शुरुआती लक्षण होने पर तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में सम्पर्क करें अथवा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जौनपुर द्वारा या इंटेग्रेटेड कोविड कमांड सेंटर द्वारा जारी टेलीमेडिसिन नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश करें। स्वम् जागरूक रहें और अपने को और अपने सगे संबंधियों को रोग से बचाने की भरसक कोशिश करें।