Sunday, July 14, 2024
उत्तर प्रदेश

बेरोजगारो को गुमराहकर ब्रम्हजाल मे फसाते है उ़द्योग अधिकारी, करते है शोषण

Top Banner

 उपायुक्त उद्योग जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र एस.एस. रावत ने सर्व साधारण को अवगत कराया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना एवं ओ0डी0ओ0पी0 योजना के अन्तर्गत वर्ष 2021-22 में ऋण दिये जाने हेतु आवेदन-पत्र आमंत्रित किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के अन्तर्गत अभ्यर्थी को हाई स्कूल पास एवं आयु सीमा 18 से 40 वर्ष के बीच होना चाहिए उद्योग क्षेत्र हेतु अधिकतम रू0 25 लाख, सेवा क्षेत्र हेतु अधिकतम रू0 10 लाख स्वरोजगार स्थापनार्थ हेतु बैंक द्वारा ऋण प्राप्त किया जा सकता है,जिसमें अधिकतम 25 प्रतिशत अनुदान की ब्यवस्था भी है। आवेदन करने हेतु बेवसाइड www.diupmsme.upsdc.gov.in पोर्टल पर आन-लाइन आवेदन भरे जा सकते हैं एवं ओ0डी0ओ0पी0 योजना के अन्तर्गत जनपद हेतु ऊनी दरी कार्य हेतु ओडीओपी में चयन किया गया है ऊनी दरी कार्य को बढावा देने हेतु उक्त योजना में निम्नवत ऋण प्राप्त करने हेतु उद्योग, सेवा एवं ब्यवसाय में रू0 1.50 करोड तक का ऋण दिया जा सकता है। उक्त योजना के अन्तर्गत अभ्यर्थी की आयु 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। आवेदन करने हेतु बेवसाइड www.diupmsme.upsdc.gov.in पोर्टल पर आन-लाइन आवेदन भरे जा सकते हैं। आवेदन-पत्र पूर्ण रूप से आन-लाइन उद्योग एवं सेवा क्षेत्र के अन्तर्गत ही स्वीकार किये जायेगे।

सावधान। जिला उद्योग जौनपुर के आयुक्त श्री एस.एस. रावत द्वारा दिये गये इस विज्ञप्ति को पढ़कर खुश मत होइए कि मुख्यंत्री के द्वारा जारी मुख्य मंत्री युवा रोजगार के अंतर्गत आपकी काबिलियत को देखकर आपको ऋण दिया जाएगा, अगर आपकी सोच ऐसी है तो बिल्कुल गलत है क्योकि दिये गये इस विज्ञप्ति से स्पष्ट होता है कि यह बेरोजगार युवाओ को फसाने के लिए वर्ष 2021.22 की नई ब्रम्हजाल है जिसमे हर साल अनगिनत शिक्षित बेरोजगार फसकर अपने घर की उर्दी को जंगेले मे डारते है। इस विज्ञप्ति मे सबसे मूल बात को छिपायी गयी है शायद हमारे जिले के जिलाधिकारी महोदय को इस बात की भनक नही है कि इस तरह की विज्ञप्ति हर साल निकलती हे कभी मुख्यमंत्री ओर कभी प्रधान मंत्री योजना अंतर्गत ऋण देने की बात होती है मगर एक बात स्पष्ट नही होती है कि मुख्यमंत्री और प्रधान मंत्री कार्यालयो से आनेवाला निर्देश पत्र सिर्फ जिला उद्योग विभाग को आता है कि उन बैको को भी जाता है जिनके द्वारा उद्योग विभाग की फाइल पर ऋण जारी करना है? इस मुख्मंत्री और प्रधान मंत्री स्वरोजगार लोन के घड़ी की सुई आकर यही पर रूक जाती है जब जिला उद्योग विभाग के आयुक्त के निर्देश पर चलने वाले फील्ड आफिसर तरह तरह के फार्मील्टि बताकर असहाय युवा बेरोजगार से मनमाना पैसे ऐठते है आखिर मे बताया जाता है कि अब फाइल कम्पलिट है और अब उस बैक प्रबंधक से यह स्पष्ट करलो कि वह तुमको ऋण देने के लिए तैयार है अथवा नही? यह सवाल बहुत ही अहम और जिम्मेदारीयो से भरा है, क्योकि क्या बैक प्रबंधक को इस योजना की जानकारी नही होती है? क्या बैक प्रबंध इस ऋण को अपने घर से देता है? आखिर बैक प्रबंधक ऐसा क्यो करता है जब गहन तरिके सें खबर निकाली गयी तो पता चला कि इन बैक प्रबंधको को एडवांस मे अपना कमीसन चाहिए वह चाहे उद्योग विभाग के कर्मचारियो के जरिये अथवा किसी और के जरिये बिना कमीशन तय हुए इनके बैक मे किसी बेरोजगार को स्वरोजगार हेतु ऋण देने के लिए धन का अभाव है परंतु जैसे ही कमीशन की बात तय होती है तो क्या पूछना।
ऐसे मे सरकारो को जिला उद्योग विभाग के साथ साथ बैको मे भी योग्यता को देखते हुए बिना कमीशन ऋण देने का आदेश/निर्देश जारी करना चाहिए जिससे गरीब युवा बेरोजगार हकीकत मे अपनी योग्यतानुसार अपना उद्योग आरम्भ कर सके।