Sunday, July 14, 2024
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मीडियाकर्मियों की समस्याओ पर भी होगी अब आर-पार की लडाई – ओझा

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मीडियाकर्मियों की समस्याओ पर भी होगी अब आर-पार की लडाई – ओझा

सरकार हमारी सभी मांगे पूरी नहीं की तो आरपार की लड़ाई होगी – जितेंद्र ओझा

चुनाव बाद आचार्य शिक्षकों, मदरसा अनुदेशकों, व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को हक की लड़ाई दोगुने रफ्तार से शुरू होगी

गोरखपुर। 17 मई 2024 को सहयोग एवं कार्यकर्ता सहायता प्रकोष्ठ, भाजपा उत्तर प्रदेश के प्रदेश सह संयोजक जितेंद्र ओझा ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि इस बार सरकार बनने के बाद लड़ाई दोगुने रफ्तार से लडूंगा। प्रमुख मुद्दा आचार्य शिक्षकों, मदरसा अनुदेशकों की मांगों को प्रमुखता से पूरा कराऊंगा। जो मांगे पेपर में गजट होने के बाद और सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भी मेरे लंबे अस्वस्थ होने की वजह से पूरी नहीं हो सकी उसे भी पूरा कराने के लिए आरपार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हूँ। य़ह योगी सरकार उदासीनता दिखा रही है। क्योंकि मैं अस्वस्थ था, सरकार नहीं। साथ ही साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी उनका हक दिलाऊंगा, जो हमारी 1985 से प्रमुख लड़ाई रही थी,उसको और तेजी के साथ पूरा कराऊंगा। बीच में हमारे स्वास्थ्य की शिथिलता की वज़ह से कार्य शिथिल पड़ गया था। जिसका संगठन के लोगों ने भीतर घात करके खूब फायदा उठाया जो अब नहीं होने पायेगा। गुजरे जमाने में मेरे परिश्रम के कारण य़ह विभाग मेरे नाम से जाना जाता था। ओझा ने कहा कि एक और प्रमुख मुद्दा सदन में उठाऊंगा। जिसकी तैयारी भी मैंने शुरू कर दी है अभी से कि छोटे और मझोले अखबारों को वही अधिकार दिया जाए जो बड़े अखबारों को दिया जाता है।केंद्र सरकार की सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की खामियों एवं उच्च पद पर बैठे कुछ अधिकारियों के गलत रवैये से आज छोटे एवं मझोले अखबारों पर संकट खड़ा हो गया है। अगर केंद्र सरकार इस नीति को वापस नहीं लेती है तो छोटे एवं मझोले अखबारों का अस्तित्व खत्म हो जायेगा। जिसे आजादी के बाद ऐसा काला कानून पहली बार देखने को मिलेगा।अगर छोटे मझोले अखबार बंद हो जायेंगे तो सरकारें मनमानी करना शुरू कर देंगी। सरकार को देशहित और मिडिया हितों को ध्यान में रखते हुए तत्काल इस कानून को वापस ले लेना चाहिए। अगर सरकार इस कानून को वापस नहीं लेती है तो आरपार की लड़ाई लडी़ जायेगी। साथ ही साथ प्रेस से जुड़े मीडिया कर्मियों को सरकार द्वारा 10000 (दस हजार रुपये) रुपये शासकीय मानदेय भी दिया जाए और सरकारी विज्ञापन बराबर रूप से सभी अखबार वालों को दिया जाए जो आर एन आई में रजिस्टर्ड हैं। ओझा ने कहा कि हमारे इन चार बिंदुओं पर कार्रवाई पूरी होने से पहले ही गलत रिपोर्ट देकर कुछ आईएएस अफसरों ने सरकारों को भ्रमित कर दिया। जिससे कार्यवाहियाँ ठप हो गई। ओझा ने सावधान करते हुए उन अफसरो को बोला है जो गलत तथ्य प्रस्तुत करके छोटे व मझोले अखबारों को बंद कराना चाहते हैं जिससे अधिकारियों के भ्रष्टाचार की कलई न खुले और केंद्र सरकार की छवि को खराब किया जा सके। ऐसे अधिकारियों को किसी भी हालत में बक्शा नहीं जायेगा। ओझा ने कहा कि इन अफसरों के ही वज़ह से लाभार्थियों को लाभ नहीं पहुंच पाता है और सरकार की बदनामी होती है और उस बजट का उपयोग सरकार को गुमराह करके अधिकारी हड़प जाते हैं। इसके लिए चुनाव बाद मै एक कमेटी का निर्माण करने जा रहा हूं । आप सभी देशवासी और खासतौर से उत्तर प्रदेश के निवासी भली प्रकार जानते हैं मेरा जीवन में कोई नीहित स्वार्थ नहीं रहा,चाहे राजनीति से और न जनता से। मैं सेवा भाव से ही कार्य किया और करता रहूंगा। जनता के लिए ही हमने 1998 में कलेक्टर को भी नहीं बक्शा था। यह बातें किसी से छुपी नहीं है। ओझा ने कहा कि यदि मीडिया कर्मियों को उनका अधिकार स्वतंत्र रूप से नहीं दिया गया जो की सत्य उजागर करते हैं,और आचार्य जी शिक्षकों को मदरसा अनुदेशकों को साथ ही हमारे आंगनबाड़ी वर्करों को तो अब और ज्यादा दिन न्याय के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। जहां तक हमारे मनरेगा मजदूरों की बात है उनके मामले पर चुनाव के पहले तो ₹500 मजदूरी के लिए सार्थक पहल चल रही थी। उम्मीद है हमें सफलता मिलेगी। ओझा ने कहा कि हम इस बैठक हाल में वोट की वकालत करने नहीं आए हैं।मजबूत सरकार बनाने की बात अवश्य करते हैं ताकि कुछ जटिलताएं हैं जिसे मैं सड़क से सदन तक दौड़कर आपके पक्ष में करवा सकूं ताकि कल सरकारों के पास यह कहने का विकल्प न बचे कि हमारी बहुमत की कमी है, इसलिए हम आपकी सहायता नहीं कर पा रहे हैं। मैं कोई चूक नहीं करना चाहता हूं,आपके सहयोग से आपके भविष्य और देश की उन्नत के लिए देश को एक बार फिर मोदी जैसे शख्सियत की जरूरत है ऐसा एहसास मुझे हो रहा है बाकी आपकी इच्छा जय हिन्द।