Saturday, July 13, 2024
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मौजूदा अर्थव्यवस्था का प्राणवायु बनेगा एमएलएम (विजय शंकर श्रीवास्तव)

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बी बीसी इंडिया न्युज24 संवाददाता : एक मुलाकात में विजय शंकर श्रीवास्तव  (पत्रकार, रचनाकार, मोटिवेशनल स्पीकर, विचारक) ने भारत की युवा पीढ़ी को इंगित करते हुए कहा कि अब देश का भविष्य आपके हाथ में है। कोविड-19 ने यह भयावह स्थिति उत्पन्न कर दी है कि मजबूरीवश यह कहना पड़ रहा है, काश! यह जिम्मेदारी आपके ऊपर बोझ की तरह न पड़ती तो अच्छा होता लेकिन परिस्थितियां ऐसी हैं कि हमें आपको आगाह करना पड़ रहा है कि अब आपको अपना, अपने परिवार, अपने दोस्तों और अपने पड़ोसियों के साथ-साथ देश का भी ख्याल रखना होगा, यानी जिस काबिल हों आप अब आपको अपने हुनर का परिचय देना पड़ेगा क्योंकि यह वक्त का तकाजा है। हमने भी अपने खेलने-कूदने की उम्र में ऐसा ही कुछ बोझ उठाया था, हालांकि हमारे समय में प्रगति के इतने अवसरनहीं थे, प्लेटफॉर्म नही थे, इतना पैसा नहीं था, ग्लोबलाईजेशन नहीं हुआ था, हुनर का उपयोग नहीं था। अब  सारे अवसर होते हुए भी आपको लड़ना होगा। अब कुछ भी करने से पहले आपको केवल अपने बारे में ही नहीं बल्कि अपने से पहले अपने देश के बारे में सोचना होगा। अवसर होते हुए भी आपको समझदारी से निर्णय  लेना होगा क्योंकि आपके पास योग्यता भी है और विदेशों में अच्छापैकेज आपको बुलाएगा भी, लेकिन अब आपको समझौता करना ही होगा, अब जन्मभूमि को ही कर्मभूमि बनाना होगा। अब वक्त ऐसा है कि आपकी जेब में पैसा भी होगा, बाजार में सामान अच्छा और सस्ता भी उपलब्ध होगा, इसके बावजूद आपको महंगा और थोड़ा खराब लेकिन स्वदेशी सामान ही खरीदना होगा। हर क्षण, हर पल देश को आगे रखकरसोचना होगा, स्वाबलंबी बनना होगा, खुद को चेक करें यदि नौकरी देने लायक बन सकते हैं तो बनें, नौकरी ढूंढ़ना बंद करें। कोई रास्ता ना मिले तो मल्टी लेवल मार्केटिंग का अध्ययन करें। मल्टी लेवल मार्केटिंग चाहे प्रोडक्ट आधारित हो अथवा नॉन प्रोडक्ट आधारित, अध्ययन करें, जो भी कंपनीया सिस्टम पसंद आए काम करें क्योंकि पूरी दुनिया में वर्तमान में मल्टी लेवल मार्केटिंग ही एकमात्र ऐसा माध्यम है जो कोरोना काल में डगमगाई किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर सकता है। अब वक्त है जन्मभूमि को ही कर्मभूमि बनाने की, हर क्षण देश को आगे रखकर सोचें ध्यान रहे तमाम विदेशी कंपनियां आपके देश में देसी बनकर कार्यरत हैं। भले ही कष्ट उठाना पड़े, भले ही एक ठोकर खानीपड़े, भले ही खुद की कंपनी खोलनी पड़े, खोलें, शुरुआत करें, डरें नहीं हिम्मत से नेक नीयत से काम करें। खुली किताब की तरह हर परिचय पत्र के साथ जितना कानून की जानकारी हो, उतने से ही कार्य करें। कानून के सामने सारे हिसाब-किताब के साथ उपस्थित होने को तैयार रहें, नई शुरुआत करें कानून से। यह कानून आपके सहयोग के लिए है, उसको अपना गार्जियन समझें कोई कष्ट नहीं होगा। बहुत से नए नवेले चेहरों ने हिम्मत दिखाई है, स्टार्टअप किया है। खुद के साथ-साथ औरों को भी रोजगार देने का बीड़ा उठाया है। वे काबिले तारीफ हैं, उनके जज्बे को सलाम करता हूँ। एकदम  डरियेगा नहीं, विदेशीकंपनियों के एजेंट कानून में आपको उलझाने के लिए आपकी टांग खींचेंगे लेकिन कुछ नहीं होगा। याद रहे  आपकी नीयत साफ होनी चाहिए और दिखाई भी देना चाहिए। तथास्तु, टॉक एशियन, आईईबीए” ये सब युवा पीढ़ी के लिए होंगी सहयोगी साबित वाराणसी के कुछ उद्यमियों को उनके स्टार्टअप के लिए विजय शंकर श्रीवास्तवा ने बधाई दिया है और खुद भी उनके साथ पार्टनरशिप परगौरव करते हुए कहा है कि “तथास्तु, टॉक एशियन, आईईबीए” ये सब युवा पीढ़ी के लिए सहयोगी सिद्ध होंगी। नवयुवकों कोप्रेरित करते हुए  विजय शंकर ने कहा कि आप पवनसुत अंजनी पुत्र हनुमान की तरह हैं और वही मैं आपको याद दिलाता हूं कि आपकी योग्यता ने अपना जलवा यूट्यूब, टिकटोक, हेलो जैसे तमाम मोबाइल एप पर दिखाया है, हम उस योग्यता का अभिनंदन करते हैं, पर अब वक्त है देश प्रेम का आइये और कोशिश करिये अपने मंच पर। आपको पता है एक आइडिया आपका जीवन बदल सकता है। मंथन करिये, जोर दीजिये और कोशिश करिए कि आपका  आइडिया आपका ही नहीं , हिंदुस्तान का भी जीवन बदल सकता है।