Saturday, July 13, 2024
अपराधजौनपुर

रिस्वत के खेल मे लेखपाल गया जेल

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रिस्वत खोरी को बन्द करने का सिर्फ यही रास्ता है कि जो भी कर्मचारी रिस्वत खोरी के इल्जाम मे पकड़ा जाता है तो उसे सजा मिलने के साथ साथ उसके आला अधिकारी के कार्यशैली की चीर-फाड़ हो तो सारा मामला खुद ही समझ मे आ जाएगा ।

जनपद जौनपुर के तहसील मछली शहर के लेखपाल मुकेश यादव को सात हजार रुपए घूस लेते हुए एंटी करप्शन की टीम ने गिरफ्तार किया है यह जनपद के राजस्व विभाग के अधिकारियो के लिए एक बहुत ही गर्व कि बात है, लेखपाल मुकेश यादव के इस कृत्य से यह तो साबित हो गया कि राजस्व विभाग का अदना सा कर्मचारी जिसके पास अपना संघ होने के साथ साथ इतनी ताकत है कि वह बिना डरे किसी भी पीडित ब्यक्ति उस काम को करने का मनमाना पैसा मांगते है जिस काम को उन्हे स्वतः ही कर देना चाहिए। आखिर हमारा सर दर्द करता है और हम किसी चिकत्सक के पास जाकर सर दर्द कि एक गोली लेकर अपना दर्द बन्द कर लेते है परंतु हम यह जानने की कोशिश कभी नही करते है कि आखिर हमारे सर को दर्द करने का वजह क्या है। अगर इस सन्दर्भ मे गहन विचार किया जाये तो यह बहुत ही स्पष्ट हो जाएगा कि किसी विभाग का नीचला कर्मचारी तभी रिस्वत खोर हो सकता है जब उसके विभाग के उच्च अधिकारी अथवा उनके आका पूरी तरह से भ्रष्ट हो। अक्सर खबरो के माध्यम से इस तरह की बातो को सुनने के बाजूद विभाग के उच्च अधिकारियो को जरा भी शर्म नही आती है ? ए भ्रष्ट अधिकारी अपने मातहत कर्मचारियो पर नकेल कसने के बजाय खुली छूट दे रखते है कि जाओ मगर एक बात याद रखना कि अगर क्षेत्र मे चादी काछोगे तो आफिस आकर बांटोगे। इसी सोच का नतिजा है कि मछलीशहर तहसील में कार्यरत लेखपाल मुकेश यादव रामगढ़ सर्कल के भिदुना गांव का चार्ज संभालने वाला लेखपाल मुकेश यादव सात हजार रुपए घूस लेते हुए एंटी करेपशन टीम के हाथ लग गया। पैमाईश के नाम पर भिदुना गांव निवासी सुनील सिंह पुत्र राम अकबाल सिंह ने संपूर्ण समाधान दिवस पर एक शिकायती प्रार्थना पत्र दिया था उक्त प्रार्थना पत्र पर रिपोर्ट लगाने अथवा अपने आराजी नंबर 1140 की पैमाइश करने के लिए उक्त हल्का लेखपाल ने 7 हजार रुपए घुस मांग रहा था। प्रार्थी काश्तकार सुनील सिंह के बार-बार हल्का लेखपाल से निवेदन करने के बावजूद भी लेखपाल ने प्रार्थी के प्रार्थना पत्र का निस्तारण बिना 7000 घुस लिए नहीं करने को तैयार था तब प्रार्थी सुनील सिंह ने लेखपाल के इस आतंक से ऊबकर वाराणसी मंडल में स्थित एंटी करप्शन ब्यूरो ऑफिस जा पहुंचा जहां एंटी करप्शन के सारे नियम फॉलो करते हुए  28 अगस्त को समय 3:30 पर तहसील मछलीशहर में वाराणसी से आई एंटी करप्शन की टीम ने हल्का लेखपाल को 7000 घूस लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद कानूनी कार्रवाई हेतु एंटी करप्शन वाराणसी

की टीम ने भ्रष्टाचार में लिप्त उक्त भ्रष्ट लेखपाल को मछलीशहर कोतवाली लेकर पहुंची जहां मुकदमा दर्ज करने की कार्यवाही की गयी।अब सोचना यह है कि क्या लेखपाल मुकेश यादव को जेल मे डाल देने से इस तरह की रिस्वतखोरी बन्द हो जाएगी? कदापि नही , क्योकि इस रिस्वत खोरी को बन्द करने का सिर्फ यही रास्ता है कि जो भी कर्मचारी रिस्वत खोरी के इल्जाम मे पकड़ा जाता है तो उसे सजा मिलने के साथ साथ उसके आला अधिकारी के कार्यशैली की चीर-फाड़ हो तो सारा मामला खुद ही समझ मे आ जाएगा और हर अधिकारी अपने मातहत कर्मचारियो को हर सुबह हिदायत देगे कि कि अगर क्षेत्र मे कोई शिकायत मिली तो बक्शे नही आओगे और जो विभागीय संघ के लोग (जैसे लेखपाल संघ आदि) किसी बात को तुल देकर तील का ताड़ बनाते है वे सब रिस्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़े जाने पर अपनी जबाबन बन्द क्यो रखते है? यह एक यक्ष प्रश्न की तरह हमेशा पीछा करता है। अगर ऐसा हुआ तो सरदर्द की नौबत से सदा सदा के लिए छुटकारा मिल सकता है।