Sunday, July 21, 2024
आस्थाजौनपुर

सोंधी के रामलीला की प्रथम मीटिंग सम्पन्न।

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25 मार्च, रामजानकी सोंधी पार्टी समिति की एक बैठक पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रत्येक वर्ष के लिए 2023 की रैली में, विजय शंकर ग्रैविराज, राजू (प्रबंधक) के नेतृत्व में विशेष परामर्श के साथ सम्पन हुई, जिसके अंतर्गत डॉ. 16-10-2023 को सभी कलाकारों का उत्साहवर्द्धन करते हुए श्री अजयग्र्रा(मोनू)अभिषेक नंद सिन्हा(बच्चा) और आदर्श कुमारसर्वा(रिशु)पंकज यादव आदि के साथ विचार-विमर्श और दिशा निर्देश दिए गए। छोटे लाल यादव, श्री शेर बहादुर श्रीवास्तवा, श्री सूरी यादव, श्री रतन जी महाराज के साथ  दर्शक

 दीर्घा की व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रबंधक सागर ने विचार-विमर्श किया। उक्त अवसर पर शिवमश्रवा, आयुषव्रा(टीमज्लस) बी0के0 यादव, शैलेस नंद सिन्हा,पंकज कुमार इत्यादि उपस्थित रहे।समस्त रामलीला कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों ने श्री प्यारे मोहन श्रीवास्तवा,श्रीमती रानी बहिनजी, श्री शिवाजी श्रीवास्तवा, श्री लालता सोनकर इत्यादि वरिष्ठ जनों से सफल रामलीला हेतु आशीर्वाद प्राप्त किया। अंत तः विजय शंकर श्रीवास्तवा (प्रबंधक) के साथ जौनपुर टीम ने रामजानकी रामलीला समति की समस्त कार्यवाही रिपोर्ट श्री सुरेंद्र नाथ श्रीवास्तवा(अध्यक्छ) महोदय को सौपते हुए कुशल रामलीला हेतु आज्ञा और आशीर्वाद प्राप्त किया। ज्ञातब्य हो कि शाहगंज तहसील,खेतासराय अंतर्गत ब्लॉक सोंधी जो कि अब नगर पंचायत सोंधी वार्ड संख्या छः में परिवर्तित हो चुका है वहां की रामलीला सैकड़ों वर्ष पुरानी है बताया जाता है कि वहाँ पहले उर्दू में रामलीला हुआ करती थी।वहां की रामलीता लगातार नव दिन सम्पूर्ण नवरात्रि हुआ करती है सबसे खास बात ये है कि आज तक वहां की रामलीता कभी बंद नही हुई।वहाँ के लोगों ने सिल्वर ,डायमंड जुबली जैसी आकड़ो में विष्वास नही किया लेकिन समस्त गाँव की आस्था और विश्वास की वजह से तमाम विकट परिस्थितियों के बाद भी रामलीता सम्पन्न होती ही है।वहाँ के बहोत से कलाकार अब जौनपुर रहते है खासतौर से प्रबंधक का परिवार परन्तु सम्पूर्ण व्यवस्था उनके कुशल निर्देशन से ही सम्पन्न होता है जौनपुर के लोगों जिसे यहां हम जौनपुर की टीम से सम्बोधित किया है को सोंधी के लोग अटूट स्नेह करते है जिसकी वजह से प्रबंधक का परिवार हर वर्ष अपनी सक्रिय भूमिका कई पीढ़ियों से निभाता रहा है जौनपुर टीम संस्थापक सदस्यों की कड़ी है।प्रबंधक के कथनानुसार हमारा गाँव हमारा गार्जियन है वो हमारी पहचान है रामलीला हमारी अटूट आस्थाऔर हमारे बुजुर्गों की परिपाटी ही नहीं रामलीला हमारी और हमारे बुजुर्गों की प्रार्थना है।बगैर गाँव और रामलीला के हम अधूरे हैं।