धर्म, परंपरा और सम्मान की आवाज़ बना सनातनी किन्नर अखाड़ा – आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरी (टीना मां)
प्रयागराज, उत्तरप्रदेश -सनातन धर्म की रक्षा और उसके मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए सनातनी किन्नर अखाड़ा निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रहा है। अखाड़े की प्रमुख आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरी, जिन्हें श्रद्धालु प्रेमपूर्वक टीना मां के नाम से जानते हैं, ने स्पष्ट कहा कि सनातन धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पवित्र और व्यापक पद्धति है, जिसकी रक्षा करना प्रत्येक सनातनी का कर्तव्य है।टीना मां ने कहा कि किन्नर समाज प्राचीन काल से ही सनातन संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है। धर्मग्रंथों, महाकाव्यों और लोकपरंपराओं में किन्नरों का विशेष स्थान रहा है, लेकिन समय के साथ समाज ने उन्हें हाशिये पर धकेल दिया। सनातनी किन्नर अखाड़ा न केवल धर्म की रक्षा के लिए, बल्कि किन्नर समाज को सम्मान, पहचान और आध्यात्मिक नेतृत्व प्रदान करने के उद्देश्य से कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि अखाड़ा देशभर में धार्मिक अनुष्ठान, प्रवचन, संत समागम और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से सनातन मूल्यों का प्रचार कर रहा है। साथ ही युवाओं को अपनी संस्कृति, परंपरा और धर्म के प्रति जागरूक किया जा रहा है, ताकि वे भटकाव से बचें और राष्ट्र व धर्म की सेवा में योगदान दें। टीना मां ने यह भी कहा कि सनातन धर्म सहिष्णुता, करुणा और समरसता का संदेश देता है। किन्नर अखाड़ा इसी भावना के साथ समाज के सभी वर्गों को जोड़ने का कार्य कर रहा है। उन्होंने सरकार और समाज से अपील की कि किन्नर समाज को सम्मानजनक स्थान देते हुए उन्हें धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में समान अवसर प्रदान किए जाएं। अंत में उन्होंने कहा कि जब तक सनातन धर्म सुरक्षित है, तब तक भारतीय संस्कृति सुरक्षित है, और उसकी रक्षा के लिए सनातनी किन्नर अखाड़ा सदैव सजग और समर्पित रहेगा।

BBC India News 24 wwwbbcindianews24.com