जौनपुर, रामपुर के पॉवर हाउस सुरेरी के कारनामा
रामपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले कोचारी, सुरेरी, अडीयार जगदीशपुर और मलेथू सहित कई ग्रामीण इलाकों में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। भीषण गर्मी और उमस के बीच घंटों की अघोषित बिजली कटौती ने आम लोगों का जीवन संकट में डाल दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि 24 घंटों में मुश्किल से 6 से 7 घंटे बिजली मिल रही है, वह भी बार-बार ट्रिपिंग और लो-वोल्टेज की समस्या के साथ।
सरकार जहां “हर घर बिजली” और “बेहतर आपूर्ति” के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि गांवों में लोग रात-रात भर जागने को मजबूर हैं। बिजली विभाग की कथित लापरवाही और उदासीन रवैये से ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया है।
भीषण गर्मी में तड़प रहे मासूम, बुजुर्ग और मरीज
ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी और उमस इतनी ज्यादा है कि बिना पंखे और कूलर के घरों में रहना मुश्किल हो गया है। जिन परिवारों के घर टिन शेड के हैं, वहां हालात और भी भयावह हैं। छोटे-छोटे बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं।
एक ग्रामीण ने गुस्से में कहा:
“बिजली विभाग सिर्फ बिल वसूलने के समय जागता है। जब बिजली देने की बारी आती है तो अधिकारी फोन उठाना तक बंद कर देते हैं। रात भर बच्चे रोते रहते हैं, बुजुर्ग गर्मी से तड़पते हैं, लेकिन विभाग को कोई फर्क नहीं पड़ता।”
लोगों का कहना है कि भीषण गर्मी के कारण “हीट स्ट्रोक” का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। बच्चों का शरीर इतनी गर्मी सहन नहीं कर पा रहा, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ने का खतरा लगातार बना हुआ है।
पानी और स्नान तक के लिए जूझ रहे लोग
बिजली संकट का असर केवल रोशनी तक सीमित नहीं है। गांवों में मोटर और पंप न चल पाने के कारण लोगों को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। कई घरों में पीने के लिए ठंडा पानी तक उपलब्ध नहीं है। लोगों को स्नान और दैनिक जरूरतों के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है।
खेती-किसानी पर संकट, सूखने लगी फसलें
बिजली की भारी कटौती ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में लगे ट्यूबवेल बिजली न मिलने के कारण बंद पड़े हैं। समय पर सिंचाई न होने से फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं। किसानों का कहना है कि अगर जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
एक किसान ने नाराजगी जताते हुए कहा:
“दिन में बिजली नहीं, रात में भी नहीं। आखिर किसान खेती कैसे करे? सरकार सिर्फ कागजों में योजनाएं चला रही है, गांवों की असली हालत कोई देखने वाला नहीं।”
जिम्मेदार कौन? विभाग पर उठ रहे बड़े सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार शिकायतों के बावजूद बिजली विभाग के अधिकारी समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे। न तो कोई स्थायी समाधान किया जा रहा है और न ही जनता को सही जानकारी दी जा रही है। अधिकारियों की चुप्पी और लापरवाही ने लोगों के गुस्से को और बढ़ा दिया है।
विभाग की लापरवाही अब सीधे जनता की जिंदगी और स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है।
ग्रामीणों की मांग
गांवों में नियमित और पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए
लो-वोल्टेज और बार-बार ट्रिपिंग की समस्या तुरंत खत्म की जाए
शिकायतों का जवाब देने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो
भीषण गर्मी को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों को प्राथमिकता पर बिजली दी जाए
गांवों में फैला अंधेरा अब सिर्फ बिजली संकट नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का बड़ा सवाल बनता जा रहा है। जनता पूछ रही है कि आखिर कब तक ग्रामीणों को इस तरह गर्मी, अंधेरे और परेशानियों में जीने के लिए मजबूर किया जाएगा?
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