आरटीओ कार्यालयों में भ्रष्टाचार का जाल: बिना ‘सुविधा शुल्क’ के काम कराना हुआ दूभर – BBC India News 24
15/08/26
Breaking News

आरटीओ कार्यालयों में भ्रष्टाचार का जाल: बिना ‘सुविधा शुल्क’ के काम कराना हुआ दूभर

उप-शीर्षक: डिजिटल सेवाओं के दावों के बावजूद बिचौलियों का बोलबाला, आम जनता परेशान

 सरकार द्वारा सरकारी विभागों को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के तमाम दावों के बावजूद, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) में भ्रष्टाचार की जड़ें लगातार गहरी होती जा रही हैं। लर्निंग लाइसेंस से लेकर वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट और परमिट रिन्यूअल जैसे बुनियादी कामों के लिए भी आम नागरिकों को भारी मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।

ऑनलाइन व्यवस्था भी फेल, खिड़की परनो एंट्री

हाल ही में किए गए कई जमीनी सर्वेक्षणों और जन-शिकायतों से यह साफ हुआ है कि आरटीओ कार्यालयों के बाहर सक्रिय एजेंटों (दलालों) का एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है।

  • यदि कोई नागरिक सीधे काउंटर पर जाकर अपना काम कराना चाहता है, तो कागजी कमियों या तकनीकी खराबी का बहाना बनाकर उसे बार-बार दौड़ाया जाता है।
  • दलालों का वीआईपी रूट: वहीं दूसरी ओर, दलालों के माध्यम से आने वाली फाइलों को बिना किसी अड़चन के तुरंत क्लियर कर दिया जाता है।
  • सूत्रों के मुताबिक, ड्राइविंग लाइसेंस (DL) के लिए ₹1,500 से ₹3,000 और कमर्शियल वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए ₹5,000 से ₹10,000 तक का अवैध ‘सुविधा शुल्क’ वसूला जा रहा है।

दलालों के सिंडिकेट से जनता में भारी आक्रोश

कार्यालय में अपने काम के लिए आए एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:

“मैंने ड्राइविंग टेस्ट पास कर लिया था, फिर भी मेरा लाइसेंस तीन महीने तक अटका रहा। जब मैंने एक एजेंट से संपर्क किया, तो उसने अतिरिक्त पैसे लिए और महज चार दिनों में लाइसेंस मेरे घर पहुंच गया। यह पूरी तरह से प्रशासनिक विफलता है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि आरटीओ के कुछ अधिकारियों और स्थानीय दलालों की आपसी साठगांठ के बिना इतना बड़ा नेटवर्क चलना नामुमकिन है। इसके कारण न केवल जनता की जेब पर डाका पड़ रहा है, बल्कि अयोग्य चालकों को लाइसेंस मिलने से सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ रहा है।

क्या है समाधान और आगामी कदम?

इस मामले में जब परिवहन विभाग के उच्च अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने आश्वासन दिया कि भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है।

  •  संदिग्ध आरटीओ कार्यालयों में औचक निरीक्षण और विजिलेंस (सतर्कता विभाग) की टीमें तैनात की जा रही हैं।
  •  सरकार का लक्ष्य आगामी महीनों में 100% सेवाओं को ‘फेसलेस’ (मानवीय हस्तक्षेप रहित) करना है, ताकि जनता को आरटीओ दफ्तर जाने की जरूरत ही न पड़े।

आरटीओ में भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए केवल नियमों का ऑनलाइन होना काफी नहीं है, बल्कि जवाबदेही तय करना और भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करना समय की मांग है।

 

 

 

Check Also

Indian-origin engineer Paul Sushruta Gomes has created a new identity of success in America

Indian-origin engineer Paul Sushruta Gomes has created a new identity of success in America. Los …