That ill-fated night in Pratapgarh… which destroyed the world of an entire family in a single moment. – BBC India News 24
10/10/26
Breaking News

That ill-fated night in Pratapgarh… which destroyed the world of an entire family in a single moment.

प्रतापगढ़ की वह मनहूस रात… जिसने एक ही पल में पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी

प्रतापगढ़ के महुली मोहल्ले में बीती वह मनहूस रात शायद ही कोई कभी भूल पाएगा। तेज बारिश की बूंदों के बीच हर कोई अपने-अपने घरों में सुकून की नींद सो रहा था। किसी को क्या पता था कि कुछ ही पलों में एक परिवार की सारी खुशियां हमेशा के लिए मलबे में दफन हो जाएंगी।

करीब 100 साल पुराना जर्जर मकान अचानक तेज आवाज के साथ भरभराकर गिर पड़ा। उस वक्त घर के सभी सदस्य एसी चलने के कारण एक ही कमरे में गहरी नींद में सो रहे थे।

किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। देखते ही देखते पूरा मकान मलबे के विशाल ढेर में बदल गया और उसके नीचे दब गईं कई जिंदगियां हादसा इतना भयावह था कि चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग बदहवास होकर घटनास्थल की ओर दौड़े। हर कोई अपने हाथों से मलबा हटाने की कोशिश कर रहा था। किसी को उम्मीद थी कि शायद कोई सांस लेता हुआ मिल जाए, लेकिन जैसे-जैसे मलबा हटता गया, वैसे-वैसे दिल दहला देने वाले दृश्य सामने आते गए। हर शव के बाहर निकलने के साथ लोगों की आंखें नम होती चली गईं और पूरा माहौल चीखों और सिसकियों से गूंज उठा।

इस दर्दनाक हादसे में माता-पिता, बेटा, बहू और दो मासूम बच्चों सहित एक ही परिवार के छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि परिवार का एक सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गया। एक ही पल में हंसता-खेलता परिवार हमेशा के लिए बिखर गया। जिन आंगनों में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सिर्फ सन्नाटा और मातम पसरा हुआ है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गया। कई घंटों तक मलबा हटाने का अभियान चलता रहा। हर कोई दुआ कर रहा था कि शायद कोई चमत्कार हो जाए, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। राहतकर्मियों और स्थानीय लोगों की आंखें भी उस दर्दनाक मंजर को देखकर नम हो गईं।

पूरा महुली मोहल्ला गहरे सदमे में है। पड़ोसी बताते हैं कि यह परिवार बेहद मिलनसार था और हमेशा खुशियों के साथ रहता था। अब उसी घर के बाहर पसरा सन्नाटा हर गुजरने वाले को भीतर तक झकझोर देता है। किसी के पास इस दर्द का जवाब नहीं है।

इस हादसे ने एक बार फिर जर्जर भवनों की स्थिति और उनकी समय पर मरम्मत की जरूरत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों की जुबान पर बस एक ही बात है—अगर इस पुराने मकान की समय रहते मरम्मत या सुरक्षित व्यवस्था कर दी जाती, तो शायद आज छह जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।

प्रतापगढ़ की यह मनहूस रात सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि कई सपनों, रिश्तों और खुशियों के हमेशा के लिए खत्म हो जाने की दर्दनाक कहानी बन गई है। इस त्रासदी ने पूरे जिले को गहरे शोक में डुबो दिया है और पीछे छोड़ गई है ऐसा दर्द, जिसे शायद समय भी कभी पूरी तरह भर नहीं पाएगा।

पुलिस के मुताबिक, हादसे में मकान मालिक प्रमोद श्रीवास्तव (60), उनकी पत्नी रीता (55), छोटा बेटे नितिन (25), बड़ी बहू माधुरी (23) और माधुरी के दो बेटे माधव (2) और अद्विक (10 माह) की मौत हो गई। जबकि प्रमोद के बड़े बेटे अमन (28) हादसे में सुरक्षित हैं।

 

REPORT – SALMAN KHAN

Check Also

A platform for talents was set up at the Rajasthan International Centre, where talents from India and abroad received the Utkarsh Shri Award.

राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में सजा प्रतिभाओं का मंच, देश-विदेश की प्रतिभाओं को मिला उत्कर्ष श्री …