सुनो रे भाई, सुनो रे बहना, एक बात बतलाता हूँ, पाँच साल का रोना छोड़ो, तुमको जगाने आता हूँ।
चन्द रुपयों की लालच में, अपना भाग्य न बेचना, शराब और साड़ी के बदले, बच्चों का भविष्य न बेचना!
वो आएगा थैली लेकर, मन में लालच बोएगा, आज जो तुमको दारू देगा, कल वो तुम पर सोएगा।
एक रात की दावत होगी, साख तुम्हारी जाएगी, तुम्हारी एक गलती भैया, पीढ़ियों को रुलाएगी।
मत बेचना अपना ईमान, मत होना तुम लाचार, वोट तुम्हारा ताकत है, मत करना इसे बेकार!
सड़क न होगी, स्कूल न होगा, अस्पताल भी टूटेगा, जब कुर्सी पर बैठा नेता, तुमको जमकर लूटेगा।
तब हाथ जोड़कर जाओगे, तो वो आँख दिखाएगा, ‘खरीदा है तुमको पैसों से‘, कह कर तुम्हें भगाएगा।
तब सर पकड़कर रोओगे, जब बीत जाएगा वक्त, जागो जनता जागो अब, तुम हो जाओ थोड़े सख्त!
जात–पात और धर्म के झगड़े, सब नेता की चाल है, गरीब यहाँ और गरीब हुआ, देखो कैसा हाल है।
उसे चुनो जो काम करे, जो दुख में साथ निभाएगा, जो लालच देकर वोट ले, वो कभी काम न आएगा।
वोट तुम्हारा कीमती है, इसकी कीमत जानो तुम, देश के तुम ही मालिक हो, अपनी ताकत पहचानो तुम!
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