सोनभद्र से उठी एक नई पहचान: किरण किन्नर बनीं महामंडलेश्वर
सोनभद्र – सोनभद्र की मिट्टी ने एक बार फिर इतिहास रचा है। इस बार यह गाथा केवल सम्मान की नहीं, बल्कि स्वीकृति, संघर्ष और आत्मगौरव की है। किन्नर समाज की किरण किन्नर का महामंडलेश्वर पद पर अभिषेक उस बदलते समाज की तस्वीर है, जो अब सीमाओं को नहीं, समानता को पहचान दे रहा है।इस ऐतिहासिक क्षण के पीछे एक सशक्त आध्यात्मिक छाया स्पष्ट रूप से दिखाई देती है—आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कौशल्यानंद गिरि “टीना मां”। टीना मां केवल एक नाम नहीं, बल्कि वह शक्ति हैं जिन्होंने इस परिवर्तन को दिशा दी। उनके सान्निध्य में दिया गया यह सम्मान एक संदेश है कि सनातन परंपरा में हर आत्मा का स्थान है, हर जीवन पूजनीय है।जहां कभी उपेक्षा की परछाइयां थीं, आज वहीं सम्मान की रोशनी फैल रही है। यह रोशनी केवल किरण किन्नर की नहीं, बल्कि उस सोच की है जिसे टीना मां ने अपने आशीर्वाद और दृष्टिकोण से प्रज्वलित किया है। जिले भर में इस खबर ने उत्साह का संचार कर दिया है। लोग इसे एक नई शुरुआत, एक नई सोच और एक नए समाज का संकेत मान रहे हैं—जहां भेदभाव की दीवारें गिर रही हैं और स्वीकार्यता का आकाश विस्तृत हो रहा है। किरण नंद गिरी की यह उपलब्धि आने वाले समय में एक मिसाल बनेगी। और इस मिसाल की नींव में टीना मां का वह आशीर्वाद अंकित रहेगा, जिसने यह सिखाया कि सच्चा धर्म वही है, जो सबको साथ लेकर चले।

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