“वृक्षारोपण बनाम औपचारिकता: ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में जनसंवेदना तो है, पर व्यापक क्रियान्वयन और उत्तरदायित्व का अभाव” – BBC India News 24
08/09/26

“वृक्षारोपण बनाम औपचारिकता: ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में जनसंवेदना तो है, पर व्यापक क्रियान्वयन और उत्तरदायित्व का अभाव”

संवाददाता – बी.बी.सी. इंडिया न्यूज 24, जौनपुर

जौनपुर, बुधवार, विशेष रिपोर्ट
औषधि व्यवसायियों के संगठन केमिस्ट एंड फार्मेसी वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा जिला औषधि निरीक्षक कार्यालय परिसर में आयोजित “एक पेड़ मां के नाम” कार्यक्रम, जहां प्रतीकात्मक वृक्षारोपण की गई एक सराहनीय पहल प्रस्तुत की गई, वहीं इस आयोजन ने एक बार फिर यह प्रश्न भी खड़ा कर दिया कि क्या ऐसे कार्यक्रम महज औपचारिकता बनकर रह गए हैं, या वाकई धरातल पर कोई ठोस और स्थायी परिवर्तन लाने की नीयत भी मौजूद है?

प्रतीकात्मकता बनाम परिणाम:
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिला औषधि निरीक्षक श्री रजत पांडे ने माँ के सम्मान में वृक्ष लगाने को एक भावनात्मक अपील का स्वरूप दिया, जो नि:संदेह भावनात्मक दृष्टि से प्रेरणादायक प्रतीत होती है। परंतु, क्या यह भावनात्मकता योजनाबद्ध पौध संरक्षण एवं निगरानी योजना में परिवर्तित भी होगी, या केवल कार्यक्रम स्थल पर दो घंटे के फोटो सत्र तक सीमित रहेगी?

परिसर तक सीमित प्रयास:
वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन केवल औषधि निरीक्षक कार्यालय के परिसर तक सीमित रहा, जबकि पर्यावरणीय संकट समूचे जनपद को अपनी चपेट में लिए हुए है। ऐसे में यह सवाल मौजूं है कि क्या यह महज स्थानीय प्रचार आधारित कार्यक्रम था या व्यापक जनसहभागिता एवं दीर्घकालिक अभियान की पहल?

उत्तरदायित्व और पालन की अनुपस्थिति:
कार्यक्रम में फलदार, छायादार और औषधीय पौधे लगाए गए, किंतु न तो यह स्पष्ट किया गया कि इन पौधों की संरक्षण, सिंचाई एवं दीर्घकालिक देखभाल की व्यवस्था कौन करेगा, और न ही कोई ऐसी निगरानी समिति गठित की गई जो इस पहल को भविष्य में सतत बनाए रखे। वृक्षारोपण का उद्देश्य तब तक अधूरा है जब तक उसकी देखभाल और जीवित रहने की जिम्मेदारी सुनिश्चित न की जाए।

प्रश्नचिह्न खड़ा करता उत्साहवर्धन:
कार्यक्रम में अध्यक्ष महेंद्र कुमार द्वारा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रदूषण रहित वातावरण की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया, किंतु संगठन द्वारा जनपद के अन्य क्षेत्रों—फार्मेसी दुकानों, निजी परिसर, या ग्रामीण क्षेत्रों—में इस पहल को विस्तारित करने की कोई ठोस घोषणा या योजना प्रस्तुत नहीं की गई। ऐसे में यह भाषण अधिक प्रतीकात्मक और कम व्यावहारिक प्रतीत होता है।

पर्यावरणीय संरक्षण: केवल भाषण नहीं, दायित्व है
भारत के पर्यावरणीय कानूनों व उत्तरदायित्वों के अनुसार, किसी भी वृक्षारोपण अभियान को केवल कार्यक्रम या प्रेस विज्ञप्ति तक सीमित रखना एक प्रकार से ‘जन संवेदनशील विषय का औपचारिक उपभोग’ कहा जा सकता है। जब तक स्थानीय निकायों, पर्यावरण विभाग, और नागरिक समाज संगठनों के समन्वय से स्थायी मॉनिटरिंग प्रणाली स्थापित नहीं की जाती, तब तक इस प्रकार के आयोजन अल्पकालिक जनसंपर्क गतिविधि के रूप में ही रहेंगे।

निष्कर्ष:
“एक पेड़ माँ के नाम” एक प्रेरक पहल हो सकती है यदि इसे व्यापक दृष्टिकोण, विधिक योजना, और दायित्वबद्ध निगरानी के साथ लागू किया जाए। अन्यथा, यह आयोजन उन अनेक अभियानों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिनकी प्रेस विज्ञप्तियाँ छपती हैं, पर पौधे सूख जाते हैं।
संगठन, जिला प्रशासन एवं पर्यावरण विभाग से अपेक्षा की जाती है कि वे इस प्रकार की गतिविधियों को व्यापक जनजागरूकता, क्रियान्वयन रणनीति और स्थायी दायित्व के साथ जोड़ें, अन्यथा ‘हरित भारत’ का स्वप्न महज एक नारा बनकर रह जाएगा।

Check Also

Sisters tied the *Raksha Sutra* to BJP leader Dr. Ashutosh Tripathi.

बहनों ने भाजपा नेता डॉ. आशुतोष त्रिपाठी को बांधा रक्षासूत्र प्रतापगढ़। गुरुवार को सदर विधानसभा …