A grand program was organized in Dumdum village under the program Mera Gaon Mera Teerth. – BBC India News 24
08/06/26
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A grand program was organized in Dumdum village under the program Mera Gaon Mera Teerth.

प्रतापगढ़ ज़िले में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर “मेरा गांव, मेरा तीर्थ” कार्यक्रम के तहत दमदम गांव में भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल एक स्मरण दिवस था, बल्कि गांव की संस्कृति, परंपरा और सामाजिक चेतना को एक सूत्र में पिरोने का महत्वपूर्ण प्रयास भी था। कार्यक्रम की शुरुआत पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करके की गई। इस अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता आलोक पांडेय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके आगमन से गांव के लोगों में उत्साह का माहौल देखने को मिला।

 

आलोक पांडेय ने अपने संबोधन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद के सिद्धांत को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि दीनदयाल जी का सपना था कि भारत का विकास गांवों के विकास के बिना अधूरा है। “मेरा गांव, मेरा तीर्थ” जैसे कार्यक्रम इसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हैं। यह पहल न केवल ग्रामीणों को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम है, बल्कि गांवों की पहचान को मजबूत करने का भी प्रयास है। पांडेय ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि गांव की प्रगति में युवाओं की सक्रिय भागीदारी ही वास्तविक परिवर्तन ला सकती है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता, महिलाएं, छात्र और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। सभी ने मिलकर दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए और उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया। इस अवसर पर स्वच्छता, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और ग्राम विकास जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। कई वक्ताओं ने कहा कि गांव तभी तीर्थ बन सकता है, जब वहां स्वच्छता, भाईचारा और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी जाए।

गांव के बुजुर्गों ने बताया कि ऐसे कार्यक्रम ग्रामीणों के बीच आपसी एकता को मजबूत करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक धरोहर को समझने का अवसर देते हैं। कई युवाओं ने भी अपने विचार रखे और गांव को स्वच्छ व आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया। महिलाओं ने विशेष रूप से कहा कि गांव में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सके।

कार्यक्रम के अंत में आलोक पांडेय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सपनों का भारत तभी साकार होगा, जब हर गांव आत्मनिर्भर बनेगा। उन्होंने ग्रामीणों को प्रेरित किया कि वे अपने गांव को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए एकजुट होकर काम करें।

यह आयोजन न केवल एक स्मारक दिवस था, बल्कि ग्रामीण विकास और सामाजिक चेतना को नई दिशा देने का प्रतीक भी बना। “मेरा गांव, मेरा तीर्थ” जैसे कार्यक्रम बताते हैं कि भारत की असली ताकत उसके गांवों में है। जब गांव स्वच्छ, शिक्षित और आत्मनिर्भर होंगे, तभी सशक्त भारत का सपना साकार होगा। दमदम गांव का यह कार्यक्रम इस दिशा में एक प्रेरणादायक कदम साबित हुआ।

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