माघ मेला स्थित सनातनी किन्नर अखाड़े में गणतंत्र दिवस पर हुआ भव्य ध्वजारोहण, राष्ट्र कल्याण की कामना के साथ गूंजे देशभक्ति के स्वर
प्रयागराज।
भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर माघ मेला क्षेत्र में स्थित सनातनी किन्नर अखाड़े में देशभक्ति, सनातन संस्कृति और राष्ट्र सेवा की भावना से ओत-प्रोत भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर सनातनी किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरि ने विधिवत ध्वजारोहण कर राष्ट्र के प्रति अपनी अटूट निष्ठा और समर्पण का संदेश दिया। गंगा की पावन रेती पर आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल देशभक्ति की भावना को प्रबल किया, बल्कि समाज में किन्नर अखाड़े की आध्यात्मिक, सामाजिक और राष्ट्रीय भूमिका को भी सशक्त रूप से रेखांकित किया। सुबह के समय अखाड़े परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। वेद मंत्रों, शंखनाद और जयघोषों के बीच जैसे ही आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरि ने तिरंगे को फहराया, पूरा वातावरण “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारों से गूंज उठा। उपस्थित श्रद्धालुओं, संतों और अखाड़े से जुड़े अनुयायियों ने तिरंगे को नमन कर राष्ट्र के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। ध्वजारोहण के पश्चात आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरि ने गंगा की पावन रेती को नमन करते हुए राष्ट्र कल्याण, देश की एकता, अखंडता और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सभ्यता और राष्ट्र की आत्मा हैं। गंगा की रेती से की गई यह कामना संपूर्ण राष्ट्र के मंगल और जन-कल्याण के लिए समर्पित है। अपने संबोधन में आचार्य महामंडलेश्वर ने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि यह हमें हमारे संविधान, हमारे कर्तव्यों और देश के प्रति हमारी जिम्मेदारियों की याद दिलाने वाला दिवस है। उन्होंने कहा कि सनातनी किन्नर अखाड़ा हमेशा से ही धर्म, राष्ट्र और समाज के हित में कार्य करता आया है और आगे भी करता रहेगा। किन्नर समाज केवल आशीर्वाद देने तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी उसकी सक्रिय भूमिका रही है और रहेगी।उन्होंने यह भी कहा कि सनातन परंपरा में सभी को समान दृष्टि से देखा गया है। किन्नर समाज ने सदियों से अपनी पहचान और अस्तित्व के लिए संघर्ष किया है, लेकिन आज सनातनी किन्नर अखाड़ा इस बात का प्रतीक है कि किन्नर समाज भी धर्म, अध्यात्म और राष्ट्र सेवा में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। गणतंत्र दिवस जैसे पावन अवसर पर ध्वजारोहण कर अखाड़े ने यह संदेश दिया है कि राष्ट्र सर्वोपरि है कार्यक्रम के दौरान अखाड़े से जुड़े संत-महंतों ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज का आयोजन उन स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं को सच्ची श्रद्धांजलि है, जिन्होंने देश को आज़ादी और एक सशक्त संविधान दिया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि देश की आज़ादी और गणतंत्र की रक्षा तभी संभव है जब समाज का हर वर्ग राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।माघ मेला जैसे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में सनातनी किन्नर अखाड़े द्वारा गणतंत्र दिवस मनाना अपने आप में एक विशेष संदेश देता है। यह आयोजन दर्शाता है कि सनातन संस्कृति और आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के बीच कोई विरोध नहीं, बल्कि दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। धर्म, अध्यात्म और राष्ट्रवाद का यह संगम उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित करता नजर आया। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगान का सामूहिक गायन किया गया। राष्ट्रगान के दौरान सभी उपस्थित श्रद्धालु और संत पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ खड़े रहे। इसके पश्चात प्रसाद वितरण किया गया और देश की शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए सामूहिक प्रार्थना की गई। स्थानीय श्रद्धालुओं और माघ मेले में आए साधु-संतों ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि सनातनी किन्नर अखाड़ा समाज में समरसता और समानता का संदेश दे रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज की रूढ़ियों को तोड़ने और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होते हैं।सनातनी किन्नर अखाड़े का यह आयोजन न केवल एक धार्मिक कार्यक्रम था, बल्कि यह सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय एकता का भी प्रतीक बना। गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगे के सम्मान और गंगा की रेती से राष्ट्र कल्याण की कामना ने यह स्पष्ट कर दिया कि सनातन परंपरा में राष्ट्र सेवा सर्वोच्च स्थान रखती है। अंततः यह कहा जा सकता है कि माघ मेला स्थित सनातनी किन्नर अखाड़े में आयोजित गणतंत्र दिवस का यह कार्यक्रम श्रद्धा, देशभक्ति और सामाजिक समरसता का अद्भुत उदाहरण रहा। आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरि के नेतृत्व में संपन्न हुआ यह आयोजन आने वाले समय में भी समाज को राष्ट्रहित के प्रति जागरूक और प्रेरित करता रहेगा।

BBC India News 24 wwwbbcindianews24.com