थाना सुरेरी में दलित उत्पीड़न का गंभीर मामला: जातिसूचक गालियाँ, जान से मारने की धमकी और दबंगों का बढ़ता वर्चस्व, थाना प्रभारी राजेश मिश्रा सुर्खियों में।
जौनपुर।
जनपद जौनपुर के थाना सुरेरी क्षेत्र से एक अत्यंत गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहाँ दलित समाज के एक युवक को न केवल जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया, बल्कि जान से मारने की धमकी भी दी गई। यह पूरा प्रकरण थाना क्षेत्र में बढ़ते दबंगों, माफियाओं और कथित संरक्षण की ओर इशारा करता है।
सूत्रों के अनुसार, थाना सुरेरी में वर्तमान में तैनात थाना प्रभारी राजेश मिश्रा इन दिनों लगातार सुर्खियों में हैं। हालांकि यह सुर्खियाँ उनकी ईमानदारी या निष्पक्ष कार्यप्रणाली के कारण नहीं, बल्कि थाना क्षेत्र में मनबढ़ दबंगों और असामाजिक तत्वों के कथित संरक्षण को लेकर चर्चा में हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब से उन्होंने थाना सुरेरी की कमान संभाली है, तब से क्षेत्र में दबंगई और अपराधियों का मनोबल तेजी से बढ़ा है।
🚨 थाना क्षेत्र में बढ़ती अराजकता
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, कहीं फर्जी तरीके से वाहनों पर “पुलिस” लिखवाकर पुलिसिया रौब दिखाया जा रहा है, तो कहीं स्वयं थाना प्रभारी की मौजूदगी में एक भाई से दूसरे भाई की जमीन पर जबरन कब्जा कराए जाने के आरोप लग रहे हैं। इतना ही नहीं, थाना क्षेत्र में एक साथ तीन लड़कियों के अचानक गायब हो जाने जैसी घटनाएँ भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। ( फिलहाल सुरेरी पुलिस तत्परता दिखाते हुए तीनों लड़कियों को खोज निकाला)
बता दे आपको मामला ग्राम सभा कोचारी, थाना सुरेरी का है। पीड़ित युवक इंद्रजीत गौतम पुत्र राधेश्याम गौतम, दलित समाज से संबंध रखते हैं। पीड़ित के अनुसार, वह विगत दिनों सुरेरी बाजार किसी कार्य से गया हुआ था। इसी दौरान कुछ युवकों से विवाद हो गया, जिसके बाद कुछ मनबढ़ दबंग युवकों ने एकजुट होकर उसके साथ मारपीट की। इस मारपीट में इंद्रजीत गौतम गंभीर रूप से घायल हुआ और उसके शरीर पर गंभीर चोटें आईं, यहाँ तक कि उसका सर भी फट गया। घटना के बाद पीड़ित ने थाना सुरेरी में लिखित प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई।
📞 जातिसूचक गालियाँ और धमकी
इसी मारपीट मामले में आरोप है कि इंद्रजीत गौतम से मार पीट करने वाले दबंग युवकों को बचाने के उद्देश्य से ग्राम निवासी मदन मौर्य ने पीड़ित इंद्रजीत गौतम को फोन कर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया, गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी, ऐसा पीड़ित ने आरोप लगाया है । पीड़ित का कहना है कि मदन मौर्य ने उसे मारपीट के मामले में जबर्दस्ती सुलह करने का दबाव बनाया और कहा कि यदि सुलह नहीं किए तो “ठीक नहीं होगा”।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि मदन मौर्य आगामी प्रधान चुनाव लड़ने की तैयारी में है और उसी उद्देश्य से गाँव में दबदबा बनाना चाहता है। पीड़ित का कहना है कि रास्ते में आते-जाते उसे घूरा जाता है, डराया जाता है और उसे हर समय यह आशंका बनी रहती है कि कभी भी उसके साथ फिर से मारपीट या जानलेवा हमला किया जा सकता है।
बता दे आपको संविधान और अधिनियमों का खुला उल्लंघन
यह पूरा मामला भारतीय संविधान और कानूनों का गंभीर उल्लंघन है— अनुच्छेद 14 – कानून के समक्ष समानता
अनुच्छेद 15 – जाति के आधार पर भेदभाव का निषेध
अनुच्छेद 17 – अस्पृश्यता का पूर्ण उन्मूलन
अनुच्छेद 21 – जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार
SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989
धारा 3(1)(r) – सार्वजनिक/निजी रूप से जातिसूचक शब्दों से अपमान
धारा 3(1)(s) – अनुसूचित जाति के व्यक्ति को जाति के नाम से गाली देना
धारा 3(2)(va) – यदि अपराध IPC के तहत हो और पीड़ित SC/ST का हो
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक दलित युवक खुलेआम जातिसूचक गालियों और जान से मारने की धमकी का शिकार हो रहा है, तो थाना सुरेरी पुलिस की भूमिका क्या है?
क्या पीड़ित को निष्पक्ष न्याय मिलेगा या दबंगों और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के आगे कानून फिर से कमजोर साबित होगा?
अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करता है या नहीं, और क्या पीड़ित दलित युवक को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के अनुसार न्याय मिल पाता है। क्या आरोपी मदन मौर्य पर कानून कार्यवाही होगी यह तो थाना सुरेरी पर निर्भर करता है?
पीड़ित ने निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई का मांग किया है।
संवाददाता – रोहित मिश्रा
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