एक रात की दावत और पांच साल का रोना: क्या आप अपनी आत्मा का सौदा कर रहे हैं? – BBC India News 24
14/06/26
Breaking News

एक रात की दावत और पांच साल का रोना: क्या आप अपनी आत्मा का सौदा कर रहे हैं?

विशेष लेख: सम्पादक दीपचन्द यादव

चुनाव आते ही आपके दरवाजे पर दस्तक देने वालों की कतार लग जाती है। कोई हाथ जोड़ता है, कोई पैर छूता है, तो कोई आपकी ‘खातिरदारी’ के नए-नए तरीके ढूंढता है। गाँव की गलियों में अचानक से दावतों का दौर शुरू हो जाता है। कहीं मुर्गा कटता है, तो कहीं बोतलें खुलती हैं। कहीं लिफाफों में बंद चंद नोट आपकी आर्थिक तंगी का ‘इलाज’ करने का ढोंग करते हैं।

लेकिन ठहरिए! मतदान केंद्र पर बटन दबाने से पहले एक बार शीशे के सामने खड़े होकर खुद से पूछिए— क्या मेरी और मेरे बच्चों की पांच साल की खुशियां, सिर्फ एक रात की दावत के बराबर हैं?”

मंडी में बिकता लोकतंत्र

जब आप चुनाव से पहले किसी प्रत्याशी से ₹500 या एक बोतल शराब स्वीकार करते हैं, तो आप अपना वोट नहीं देते, बल्कि आप खुद को ‘बेच’ देते हैं। याद रखिये, जो प्रत्याशी आपको खरीदकर चुनाव जीतता है, वह अगले पांच साल आपकी सेवा नहीं करेगा, बल्कि अपनी ‘इन्वेस्टमेंट’ (निवेश) को ब्याज समेत वसूल करेगा।

  • जब आपके बच्चे के स्कूल में शिक्षक नहीं होंगे, तब वह प्रत्याशी अपनी दावत का पैसा वसूल रहा होगा।
  • जब आपके गाँव की नालियां बजबजाएंगी और बीमारियां फैलेंगी, तब वह नेता आपकी बेची हुई ईमानदारी पर अट्टहास कर रहा होगा।
  • जब आप खराब सड़कों पर धूल फांकेंगे, तब वह अपनी नई लग्जरी गाड़ी के शीशे चढ़ाकर निकल जाएगा।

गणित समझिए: घाटे का सौदा

एक रात की दावत की कीमत मुश्किल से ₹200 से ₹500 होती है। पांच साल में 1,825 दिन होते हैं। यदि आप ₹500 में बिकते हैं, तो आपने अपने भविष्य की कीमत मात्र 27 पैसे प्रतिदिन लगाई है।

क्या आपकी और आपके परिवार की गरिमा की कीमत सिर्फ 27 पैसे है?

भिखारी नहीं, भाग्यविधाता बनें

प्रत्याशी आपको ‘भिखारी’ समझकर प्रलोभन देता है, जबकि संविधान ने आपको ‘भाग्यविधाता’ बनाया है। दावत का भोजन एक रात में पच जाएगा, शराब का नशा अगली सुबह उतर जाएगा, लेकिन गलत चुनाव का ‘हैंगओवर’ पांच साल तक आपकी और आपके गाँव की कमर तोड़कर रख देगा।

जमीर को जगाने का वक्त

वोट डालना केवल एक अधिकार नहीं, एक पवित्र अमानत है। यह अमानत आपके बच्चों के भविष्य की है।

  • सावधान रहें: उस प्रत्याशी से जो वोट खरीदने आता है, क्योंकि जो खरीदेगा, वह पक्का बेचेगा भी।
  • चुनें उसे: जो आपके हक की बात करे, जो विकास का रोडमैप दिखाए, और जिसकी छवि बेदाग हो।

निष्कर्ष: मेरे जौनपुर और देश के तमाम मतदाताओं, इस बार चुनाव में ‘पेट’ की नहीं, ‘विवेक’ की सुनें। दावत का स्वाद चंद घंटों का होता है, लेकिन स्वाभिमान का स्वाद जीवनभर का। एक रात की दावत स्वीकार करके पांच साल तक आँसू बहाने से बेहतर है कि उस दिन सादा खाना खाएं, लेकिन अपना वोट उस इंसान को दें जो आपके गाँव की तस्वीर बदल सके।

याद रहे, बिका हुआ मतदाता कभी सवाल पूछने का हकदार नहीं होता।” अपना वोट बचाएं, अपना जमीर बचाएं!

Check Also

Actress and Divalicious Mrs. Asia Universe 2026 Jennifer Pereira receives National Prestige Award Indian actress,

Actress and Divalicious Mrs. Asia Universe 2026 Jennifer Pereira receives National Prestige Award Indian actress, …