जौनपुर। एक ओर प्रदेश सरकार लगातार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय को लेकर बड़े-बड़े दावे करती नजर आती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कई बार इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर देती है। ताजा मामला जौनपुर जनपद के सुरेरी थाना क्षेत्र के अडियार गांव से सामने आया है, जहां पैतृक भूमि विवाद को लेकर एक महिला के साथ कथित अभद्रता, मारपीट और लज्जा भंग जैसी गंभीर घटना सामने आई है। आरोप है कि घटना के बाद भी स्थानीय पुलिस ने संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के बजाय केवल शांति भंग की कार्रवाई कर मामले को दबाने का प्रयास किया। अब पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक जौनपुर से न्याय की गुहार लगाई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम सभा अडियार निवासी राजेश कश्यप पुत्र शंकर कश्यप ने पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि वह अपनी पैतृक आबादी की भूमि में वैधानिक हिस्सेदार हैं। इसी भूमि को लेकर उनके चाचा अंकुर कश्यप एवं उनके परिवार द्वारा लंबे समय से विवाद किया जा रहा है। पीड़ित का आरोप है कि विपक्षीगण लगातार उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते रहे हैं।
प्रार्थना पत्र में उल्लेख किया गया है कि 22 मई 2026 की सुबह लगभग सात बजे राजकुमार, मनोज कुमार और अंकुर कश्यप उनके घर के सामने मिट्टी गिराकर कथित रूप से अवैध कब्जा करने का प्रयास करने लगे। जब राजेश कश्यप की पत्नी श्रीमती रिंकी देवी ने इसका शांतिपूर्ण विरोध करते हुए कहा कि उनके दरवाजे के सामने मिट्टी न गिराई जाए, तो आरोपित आगबबूला हो गए और गाली-गलौज शुरू कर दी।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि विवाद बढ़ने पर विपक्षियों ने महिला को धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया और बाल पकड़कर बेरहमी से मारपीट की। इतना ही नहीं, आरोप है कि इसी दौरान महिला के कपड़े फाड़ दिए गए, जिससे उसकी लज्जा भंग हुई। घटना के दौरान बीच-बचाव करने पहुंचे राजेश कश्यप को भी लात-घूंसों से पीटा गया और पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई।
सबसे अहम बात यह बताई जा रही है कि इस पूरी घटना का एक वीडियो भी मौजूद है, जिसे पीड़ित की 13 वर्षीय पुत्री ने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किया है। पीड़ित परिवार का दावा है कि वीडियो में विपक्षियों की पूरी करतूत साफ तौर पर देखी जा सकती है। इसके बावजूद पुलिस द्वारा अब तक गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज न किया जाना कई सवाल खड़े कर रहा है।
घटना के बाद पीड़ित परिवार ने तत्काल डायल 112 पर सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस दोनों पक्षों को थाने ले गई, लेकिन आरोप है कि गंभीर अपराध होने के बावजूद पुलिस ने केवल शांति भंग की कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली। पीड़ित परिवार का कहना है कि महिला सम्मान से जुड़े गंभीर मामले में पुलिस की यह कार्यशैली बेहद निराशाजनक और चिंताजनक है।
आज सरकार मिशन शक्ति, महिला सुरक्षा अभियान और महिला सम्मान की बड़ी-बड़ी बातें करती है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन, विशेष अभियान और त्वरित कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन जब जमीनी स्तर पर किसी महिला के साथ अभद्रता और लज्जा भंग जैसी घटनाएं होती हैं, तब पीड़ितों को न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि कई स्थानों पर अब भी कानून का भय अपराधियों में दिखाई नहीं दे रहा है।
स्थानीय लोगों के बीच भी इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि महिला से जुड़े गंभीर मामलों में भी तत्काल FIR दर्ज नहीं होती, तो आम जनता का पुलिस व्यवस्था से विश्वास कमजोर होना स्वाभाविक है। लोगों का मानना है कि यदि वीडियो साक्ष्य मौजूद है, तो मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक जौनपुर से निष्पक्ष जांच कराते हुए महिला उत्पीड़न, मारपीट, धमकी और लज्जा भंग जैसी धाराओं में तत्काल FIR दर्ज कराने की मांग की है। अब देखना यह होगा कि उच्च अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं।
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