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जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक बेहद सनसनीखेज और स्वास्थ्य प्रशासनिक तंत्र को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) कार्यालय में तैनात पी.एम.पी. के नोडल अधिकारी डॉ. राजीव कुमार और नईगंज स्थित ‘राजन हॉस्पिटल एण्ड सर्जिकल सेन्टर’ के संचालक अवनीश यादव के बीच कथित ‘आपराधिक साठगांठ’, संस्थागत भ्रष्टाचार और पद के घोर दुरुपयोग का एक बड़ा खुलासा हुआ है। इस पूरे सिंडिकेट के खिलाफ सजग नागरिक और पत्रकार दीपचन्द यादव ने सीधे जिलाधिकारी जौनपुर को प्रामाणिक दस्तावेजों के साथ शिकायती पत्र सौंपकर विधिक कानूनी कार्रवाई, विजिलेंस जांच और FIR दर्ज करने की पुरजोर मांग की है।
‘कागजी खानापूर्ति’ का घिनौना खेल
जिलाधिकारी को सौंपे गए आधिकारिक पत्र के अनुसार, नईगंज (एल.आई.सी. ऑफिस के समीप) संचालित ‘राजन हॉस्पिटल एण्ड सर्जिकल सेन्टर’ के विरुद्ध गंभीर चिकित्सीय अनियमितताओं, अवैध संचालन और मानकों की अनदेखी के संबंध में साक्ष्यों सहित शिकायत दर्ज कराई गई थी। हैरान करने वाला तथ्य यह है कि जांच अधिकारी डॉ. राजीव कुमार ने पदीय दायित्वों के प्रति घोर उदासीनता और संदेहास्पद आचरण दिखाते हुए अस्पताल संचालक अवनीश यादव को पूर्णतः अनुचित व अवैध लाभ पहुंचाने की दुर्भावना से कार्य किया। शिकायत दर्ज होने के बाद, कथित तौर पर दिनांक 05 नवंबर 2022 की पिछली तिथि (Backdate) अंकित करते हुए एक नितांत पक्षपातपूर्ण, तथ्यहीन और भ्रामक जांच आख्या प्रस्तुत कर दी गई। यह रिपोर्ट धरातल पर सुधार करने के बजाय महज एक कागजी खानापूर्ति थी, जिसके चलते पिछले 44 महीनों से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी इस अवैध अस्पताल के खिलाफ कोई प्रभावी दंडात्मक या विधिक कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की जा सकी।
शासन की ‘पटल परिवर्तन नीति’ को ठेंगा,
सालों से जमे हैं नोडल अधिकारी
उत्तर प्रदेश शासन की स्पष्ट नीति है कि प्रशासनिक पारदर्शिता और शुचिता बनाए रखने के लिए किसी भी पटल या स्थान पर तीन वर्ष से अधिक समय तक किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को तैनात नहीं रखा जा सकता। लेकिन जौनपुर सीएमओ कार्यालय में नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। डॉ. राजीव कुमार विगत दीर्घकाल से एक ही पटल पर कुंडली मारकर बैठे हैं। आरोप है कि इसी लंबे कार्यकाल का फायदा उठाकर उन्होंने जनपद में अवैध रूप से संचालित स्वास्थ्य माफियाओं के साथ एक अभेद्य ‘सिंडिकेट’ (Syndicate) स्थापित कर लिया है।
“पैसे की माशूका बिना पैर के ही पहाड़ पर चढ़ती है…”

विभागीय गलियारों में चर्चा का विषय बना नोडल अधिकारी का कथित अनैतिक वक्तव्य, जो उनके नैतिक पतन और भ्रष्टाचार के प्रति पूर्ण समर्पण को स्वमेव प्रमाणित (Res Ipsa Loquitur) करता है।
शिकायत पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि जनपद में मेडिकल परीक्षण (डाक्टरी) की रिपोर्ट को प्रभावित करना, दोषी चिकित्सकों को बचाना अथवा निष्पक्ष जांचों को रुकवाना इस अधिकारी के अनैतिक प्रभाव के कारण आम बात हो चुकी है। इतना ही नहीं, माननीय मुख्यमंत्री के सख्त आदेशों का उल्लंघन करते हुए इस सरकारी कार्यालय में अनाधिकृत ‘निजी/प्राइवेट व्यक्तियों’ का हस्तक्षेप है, जिन्हें न केवल संरक्षण दिया जा रहा है बल्कि शासकीय अभिलेखों तक उनकी अवैध पहुंच भी सुनिश्चित कराई गई है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत कार्रवाई की मांग
यह मामला केवल एक विभागीय अनियमितता का नहीं, बल्कि देश के कानून के तहत एक संज्ञेय और बेहद गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। शिकायतकर्ता ने विधिक बिंदुओं को रेखांकित करते हुए जिलाधिकारी से निम्नलिखित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की मांग की है:
- भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 251/258/198: लोक सेवक द्वारा विधि के निर्देश की अवज्ञा करना, लोक न्याय के विरुद्ध अपराध कारित करना तथा झूठे साक्ष्य व भ्रामक आख्या तैयार करना।
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम: लोक सेवक द्वारा अपने पदीय पद का दुरुपयोग कर स्वयं के लिए अथवा किसी अन्य व्यक्ति के लिए ‘अनुचित लाभ’ (Illegal Benefit) अर्जित करना।
जिलाधिकारी से की गई 4 सूत्रीय बड़ी मांगें:
- उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन: नोडल अधिकारी डॉ. राजीव कुमार के विरुद्ध एक स्वतंत्र विजिलेंस (Vigilance) अथवा न्यायिक मजिस्ट्रेट जांच समिति गठित की जाए और उनके द्वारा पूर्व में प्रेषित समस्त संदेहास्पद जांच आख्याओं की पुनः समीक्षा (Re-evaluation) हो।
- अस्पताल का पंजीकरण निरस्त हो: ‘राजन हॉस्पिटल एण्ड सर्जिकल सेन्टर, नईगंज’ के भौतिक, विधिक एवं चिकित्सीय मानकों की किसी अन्य निष्पक्ष अधिकारी से जांच कराकर, जनहित में इसका पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
- तत्काल दर्ज हो FIR: शासकीय अभिलेखों से छेड़छाड़ करने, निजी व्यक्तियों को लिप्त करने और शासकीय नीतियों का उल्लंघन करने वाले दोषी अधिकारियों व उनके सहयोगियों के विरुद्ध अविलंब प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए।
- तत्काल जिला बदर/स्थानांतरण: निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए डॉ. राजीव कुमार को तत्काल प्रभाव से जौनपुर जनपद से बाहर या किसी अन्य गैर-संवेदनशील पटल पर स्थानांतरित किया जाए।
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