रामपुर, जौनपुर। रामपुर बाजार में राष्ट्रीय राजमार्ग की सड़क अतिक्रमण और बेतरतीब पार्किंग की चपेट में है। सड़क के किनारे सब्जी-फल के ठेले, अस्थायी दुकानें और अन्य सामान फैले रहने के साथ ग्राहकों के दोपहिया व चारपहिया वाहन भी सड़क पर खड़े किए जा रहे हैं। नतीजा यह है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात व्यवस्था लगातार प्रभावित हो रही है और जाम के साथ दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है। स्थिति यह है कि सड़क पर ठेले और दुकानें होने के कारण वाहनों के आवागमन के लिए उपलब्ध जगह लगातार सीमित होती जा रही है। तेज रफ्तार वाहनों को कई बार अचानक दिशा बदलनी पड़ती है। ऐसे में किसी भी समय गंभीर हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता। अतिक्रमण के साथ सड़क किनारे गंदगी भी व्यवस्था की पोल खोल रही है। खराब और सड़ी-गली सब्जियां तथा अन्य कचरा सड़क के किनारे फेंके जाने से गंदगी और फिसलन की स्थिति बनी रहती है। यह स्थिति राहगीरों के साथ वाहन चालकों के लिए भी परेशानी और जोखिम का कारण बन रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर यदि लंबे समय से ठेले, अस्थायी दुकानें और अनधिकृत पार्किंग चल रही है तो जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था आखिर कहां है? सड़क की स्थिति मौके पर साफ दिखाई देती है, फिर भी प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है, यह सवाल प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
पूर्व में इस समस्या को लेकर शिकायत किए जाने के बावजूद यदि मौके पर स्थिति जस की तस बनी हुई है, तो शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया की निष्पक्षता और प्रभावशीलता की भी जांच जरूरी है। केवल रिपोर्ट लगाकर शिकायत का निस्तारण कर देना और मौके पर समस्या का बने रहना प्रशासनिक कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है। राष्ट्रीय राजमार्ग की सीमा तथा Right of Way का स्पष्ट चिन्हांकन कराकर यह तय किया जाना जरूरी है कि सड़क और राजमार्ग की भूमि पर कहां-कहां अतिक्रमण है। साथ ही ठेले और दुकानों के वेंडिंग प्रमाणपत्र तथा निर्धारित वेंडिंग स्थल की भी जांच होनी चाहिए। रामपुर बाजार की स्थिति महज यातायात की समस्या नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी से जुड़ा गंभीर विषय है। प्रशासन, राजमार्ग विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा मौके का निरीक्षण कर अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और गंदगी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई किए जाने की जरूरत है। साथ ही यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा नियमों की अनदेखी सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।
अब सवाल सीधा है—राष्ट्रीय राजमार्ग को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए जिम्मेदार विभाग कब जमीन पर उतरेंगे?
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