जौनपुर,रामपुर/ विद्युत विभाग में सुपरवाइजर के पद पर तैनात भ्रष्ट एवं दबंग सुपरवाइजर पारस नाथ मौर्य नियम-कानून को जेब में रखते हैं। विद्युत विभाग में किसको किस पद पर रखना है, और किसको हटाना है, और की गई शिकायत पर मौके पर जांच किसको करनी है, किसको नहीं, और जांच के बाद रिपोर्ट में क्या लगानी है, सब इनके इशारों पर होता है। जैसे मानो पारस नाथ मौर्य पूरा तानाशाह है, सब इनके कहने से शिकायत का निस्तारण होता है। बता दें आपको, संगठन के द्वारा की गई शिकायत पर निस्तारण में लगाई गई गलत और भ्रामक रिपोर्ट से संबंधित बात करने पर भ्रष्ट और दबंग सुपरवाइजर पारस नाथ मौर्य ने शिकायतकर्ता संगठन को ही धमकी दे डाली। उसने कहा कि, “ज्यादा बहस करोगे तो मुकदमा ठोक देंगे, अभी सही हो जाओगे।” जरा सोचिए, संगठन को फोन पर धमकाने वाला भ्रष्ट एवं दबंग सुपरवाइजर जनता के बीच कैसा व्यवहार रखता होगा? बता दें आपको, भ्रष्ट एवं दबंग सुपरवाइजर पारस नाथ मौर्य का कहना है, रीडर भ्रष्ट सुनील यादव को उक्त ग्राम सभा से हटा दिया गया है, जबकि वही रिपोर्ट में साफ-साफ लिखा गया है, रीडर सुनील यादव के खिलाफ उपभोक्ताओं से महीना वसूली का कोई प्रमाण की पुष्टि नहीं है। अब सवाल यह उठता है, अगर महीना वसूली करने वाला रिश्वतखोर सुनील यादव के वसूली की पुष्टि नहीं हुई, तो उसको उक्त ग्राम सभा से कैसे और क्यों हटा दिया गया? इससे यह साबित होता है, भ्रष्ट JE और सुपरवाइजर को भली-भांति मालूम था कि वास्तव में महीना वसूली होती है। रीडर सुनील यादव को बचाने हेतु उसको ग्राम सभा से हटाकर दूसरे ग्राम सभा में कर दिया गया। इतना ही नहीं, वही भ्रष्ट JE साहब का कहना है कि सुनील यादव की बहुत शिकायत मिलती है कि रीडिंग में बहुत हेराफेरी करता है, चंद पैसों के लिए, जिसका पुख्ता प्रमाण वाइस रिकॉर्डिंग संगठन के पास सुरक्षित है। पूरा मामला बता दे आपकी की जौनपुर। रामपुर विकासखंड के ग्राम सभा कोचारी में विद्युत मीटर रीडिंग के नाम पर उपभोक्ताओं से कथित रूप से धनराशि मांगे जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में संगठन की ओर से संबंधित अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को शिकायत भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मीटर रीडिंग के नाम पर उपभोक्ताओं से कथित रूप से हर माह धनराशि मांगी जाती है तथा भुगतान नहीं करने पर अधिक बिल आने की बात कही जाती है। संगठन ने मामले की जांच कर संबंधित उपभोक्ताओं के बयान, मीटर रीडिंग रिकॉर्ड और बिलिंग विवरण की जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता संगठन ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की थी।
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