जौनपुर: घटिया खड़ंजा निर्माण को लेकर ग्रामीणों का विरोध, दबंग प्रधान पति पर लगाए गंभीर आरोप – BBC India News 24
07/06/26
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जौनपुर: घटिया खड़ंजा निर्माण को लेकर ग्रामीणों का विरोध, दबंग प्रधान पति पर लगाए गंभीर आरोप

रामपुर (जौनपुर)। विकास खंड रामपुर अंतर्गत ग्राम सभा जगदीशपुर जमुना में कराए जा रहे खड़ंजा निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी व्याप्त है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत की निर्वाचित प्रधान मीनू यादव हैं, लेकिन पंचायत के अधिकांश कार्य उनके पति रामप्रसाद यादव उर्फ बबलू यादव द्वारा संचालित किए जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत से जुड़े विभिन्न कार्यों में प्रधान पति की सक्रिय भूमिका रहती है तथा कई मामलों में वे स्वयं निर्णय लेते हैं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में बन रहे खड़ंजा निर्माण में मानकों की अनदेखी की जा रही है। उनके अनुसार निर्माण कार्य में निम्न गुणवत्ता की ईंटों एवं टूटे-फूटे टुकड़ों का प्रयोग किया जा रहा है। आरोप है कि सड़क की ऊबड़-खाबड़ सतह को समतल किए बिना ही खड़ंजा बिछाया जा रहा है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ स्थानों पर वाहनों के आवागमन से ईंटें टूटकर बिखरने लगी हैं।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितताएं हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत से संबंधित मामलों में उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता, जिसके कारण उनमें असंतोष व्याप्त है।

बता दे आपको क्या कहते हैं नियम कानून?

पंचायती राज व्यवस्था के तहत ग्राम प्रधान के प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार केवल निर्वाचित प्रधान को प्राप्त होते हैं। उत्तर प्रदेश पंचायती राज व्यवस्था में “प्रधान पति” नाम का कोई वैधानिक पद नहीं है। किसी गैर-निर्वाचित व्यक्ति द्वारा पंचायत के आधिकारिक कार्यों का संचालन करना या प्रधान की ओर से हस्ताक्षर करना नियमों के विपरीत माना जा सकता है।

यदि किसी सरकारी अभिलेख, प्रस्ताव, भुगतान पत्रक अथवा अन्य दस्तावेज पर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रधान के हस्ताक्षर किए जाते हैं, तो मामला कूटरचना (Forgery), जालसाजी एवं सरकारी अभिलेखों में अनियमितता की श्रेणी में आ सकता है। ऐसे मामलों की जांच एवं कार्रवाई संबंधित प्रशासनिक और कानूनी प्राधिकारियों द्वारा की जाती है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, खंड विकास अधिकारी एवं संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच तथा आरोपों की सत्यता की पड़ताल करने की मांग की है।

बता दे : वर्णित सभी आरोप ग्रामीणों द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासनिक जांच के उपरांत ही तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।

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