जनपद जौनपुर के बहुचर्चित खेतासराय–खुटहन मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुंदरीकरण के लिए भले ही उत्तर प्रदेश शासन ने ₹2215.57 लाख (₹22.15 करोड़) की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति दे दी हो, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी सवालों के घेरे में है। लगभग 9.5 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को लेकर क्षेत्रीय जनता में उम्मीदों के साथ-साथ शंकाएं भी गहराने लगी हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सड़क वर्षों से जर्जर हालत में है। गड्ढों, धूल और कीचड़ के कारण रोजाना राहगीरों, स्कूली बच्चों, मरीजों और व्यापारियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। स्वीकृति के ऐलान के बावजूद निर्माण कार्य की स्पष्ट समय-सीमा, कार्यदायी संस्था और गुणवत्ता मानकों को लेकर अभी तक कोई ठोस जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
गौरतलब है कि यही वह सड़क है, जिसका उल्लेख स्वयं माननीय प्रधानमंत्री ने लोकसभा चुनाव के दौरान टीडी कॉलेज मैदान में किया था। इसके बाद भी वर्षों तक सड़क की स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। अब एक बार फिर बजट स्वीकृत होने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि कहीं यह घोषणा भी केवल राजनीतिक श्रेय लेने तक सीमित न रह जाए।
क्षेत्रवासियों को आशंका है कि यदि समयबद्ध कार्य शुरू नहीं हुआ तो
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लागत बढ़ने का खतरा
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गुणवत्ता से समझौता
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और कार्य अधूरा छोड़ दिए जाने की आशंका
से इंकार नहीं किया जा सकता। इससे पहले भी जिले में कई सड़क परियोजनाएं स्वीकृति के बाद फाइलों में सिमट कर रह गईं, जिनका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ा।
खेतासराय और खुटहन के नागरिकों का साफ कहना है कि उन्हें घोषणाओं से नहीं, जमीन पर काम चाहिए। लोगों ने मांग की है कि शासन और जनप्रतिनिधि केवल आभार प्रकट करने तक सीमित न रहें, बल्कि
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निर्माण कार्य की तिथि घोषित की जाए
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कार्य की गुणवत्ता की सार्वजनिक निगरानी हो
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और देरी होने पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
अब बड़ा सवाल यही है कि 22.15 करोड़ की यह सौगात विकास की नई कड़ी बनेगी या फिर एक और अधूरी सरकारी घोषणा बनकर रह जाएगी? जनता की निगाहें शासन और संबंधित विभागों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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