किन्नरों के हित व रक्षा के लिए सदैव तत्पर सनातनी किन्नर अखाड़ा – कौशल्या नंद गिरी
प्रयागराज – किन्नरों के हित व रक्षा के लिए सदैव तत्पर सनातनी किन्नर अखाड़ा आज केवल एक संगठन नहीं, बल्कि समाज के उस आईने की तरह है, जो हमें हमारी संवेदनहीनता और हमारी ज़िम्मेदारियों दोनों का एहसास कराता है। यह अखाड़ा उन आवाज़ों का प्रतिनिधित्व करता है, जिन्हें लंबे समय तक दबाया गया, और उन सपनों की रक्षा करता है, जिन्हें कभी पनपने का अवसर नहीं मिला। इस मानवीय आंदोलन की प्रखर पहचान हैं कौशल्या नंद गिरी। किन्नर समाज का संघर्ष केवल आज का नहीं है। बचपन से ही भेदभाव, उपेक्षा और असुरक्षा ने उनके जीवन को कठिन बना दिया। अपने ही घरों से निकाले जाना, समाज में तिरस्कार झेलना और हर कदम पर अपमान सहना — यह पीड़ा उनकी नियति बना दी गई। ऐसे अंधकारमय समय में सनातनी किन्नर अखाड़ा ने आशा की मशाल जलाई। कौशल्या नंद गिरी ने अपने नेतृत्व से यह साबित किया कि सच्ची शक्ति करुणा, साहस और समर्पण से जन्म लेती है। सनातनी किन्नर अखाड़ा किन्नरों को केवल संरक्षण नहीं देता, बल्कि उन्हें आत्मसम्मान, संस्कार और पहचान भी प्रदान करता है। यहाँ हर व्यक्ति को यह महसूस कराया जाता है कि उसका अस्तित्व मूल्यवान है और उसकी आवाज़ मायने रखती है। कौशल्या नंद गिरी का स्पष्ट संदेश है कि किन्नर समाज किसी की दया पर नहीं, बल्कि अपने अधिकार और सम्मान के साथ जीने का हक़ रखता है। आज सनातनी अखाड़ा किन्नर सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक बन चुका है। यह आंदोलन समाज से यह सवाल करता है कि क्या इंसानियत केवल शब्दों तक सीमित रहेगी या व्यवहार में भी उतरेगी। कौशल्या नंद गिरी के प्रयास यह विश्वास दिलाते हैं कि जब नेतृत्व संवेदनशील और निडर हो, तो बदलाव केवल संभव ही नहीं, बल्कि अवश्यंभावी होता है।

REPORT – SALMAN KHAN
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