सनातनी किन्नर अखाड़ा में परंपरा और संस्कार का संगम, 11 पदाधिकारियों के पट्टाभिषेक से पूर्व पिंडदान संस्कार संपन्न
प्रयागराज -सनातनी किन्नर अखाड़ा में सनातन परंपराओं की गौरवशाली झलक उस समय देखने को मिली जब 11 नवनियुक्त पदाधिकारियों के पट्टाभिषेक से पूर्व पिंडदान संस्कार का भव्य और विधिवत आयोजन किया गया। यह संस्कार सनातन धर्म में आत्मशुद्धि, पूर्वजों की शांति और आध्यात्मिक उन्नयन का प्रतीक माना जाता है। पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न इस कार्यक्रम ने अखाड़े की धार्मिक गरिमा को और अधिक सुदृढ़ किया।पिंडदान संस्कार के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, तर्पण, हवन और पिंड अर्पण की प्रक्रिया शास्त्रानुसार कराई गई। धर्माचार्यों के मार्गदर्शन में संतों, महंतों और किन्नर समाज के सदस्यों ने पूर्ण श्रद्धा और अनुशासन के साथ इस पावन कर्मकांड में सहभागिता की। आयोजन स्थल पर भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रभाव स्पष्ट रूप से अनुभूत किया गया।इस अवसर पर सनातनी किन्नर अखाड़ा की प्रमुख कौशल्या नंद गिरी ने कहा कि सनातन धर्म केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पूर्ण पद्धति है। उन्होंने कहा कि पट्टाभिषेक जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन से पूर्व पिंडदान संस्कार का आयोजन यह सुनिश्चित करता है कि पदाधिकारी आध्यात्मिक रूप से शुद्ध होकर समाज और धर्म के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करें। कौशल्या नंद गिरी ने यह भी कहा कि सनातनी किन्नर अखाड़ा सनातन संस्कृति के संरक्षण, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार के लिए सतत कार्यरत है। ऐसे प्रभावशाली धार्मिक आयोजनों से समाज को सकारात्मक संदेश मिलता है और सनातन मूल्यों के प्रति आस्था और अधिक प्रबल होती है।

Report – Salman Khan
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