कौशल्या नंद गिरी की हुंकार से जगमगाया कुंभ, वातावरण हुआ भक्तिमय
प्रयागराज – आचार्य महामंडलेश्वर सनातनी किन्नर अखाड़ा की परम पूज्या कौशल्या नंद गिरी के नेतृत्व में जब किन्नरों ने हुंकार भरी, तो कुंभ की पावन धरती मानो तेज से प्रज्वलित हो उठी। कौशल्या नंद गिरी का ओज, उनका आत्मविश्वास और उनकी दिव्य उपस्थिति ने पूरे कुंभ वातावरण को भक्तिमय और प्रकाशमान बना दिया। शंखनाद, डमरू की ध्वनि और हर–हर महादेव के गगनभेदी जयघोष के बीच कौशल्या नंद गिरी की अगुवाई में सनातन चेतना एक नई ऊंचाई पर पहुंचती दिखाई दी।कौशल्या नंद गिरी के कदम जैसे ही आगे बढ़े, वैसे ही कुंभ की दिशाएं साक्षी बन गईं। सनातनी किन्नर अखाड़े की यह हुंकार केवल स्वर नहीं थी, यह कौशल्या नंद गिरी की वर्षों की तपस्या, त्याग और साधना का तेजस्वी उद्घोष था। कौशल्या नंद गिरी की ओजस्वी वाणी में आत्मबल था, उनकी दृष्टि में करुणा थी और उनके नेतृत्व में अद्भुत आत्मविश्वास झलक रहा था। श्रद्धालु भावविभोर होकर कौशल्या नंद गिरी का नमन कर रहे थे। किसी की आंखों में श्रद्धा के अश्रु थे तो किसी के हृदय में गर्व का भाव। कौशल्या नंद गिरी के नेतृत्व में किन्नर समाज ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि सनातन परंपरा में कोई हाशिए पर नहीं, बल्कि हर आत्मा समान रूप से पूज्य है। कौशल्या नंद गिरी की हुंकार ने सामाजिक भेदभाव की जड़ें हिला दीं और समरसता का दीप प्रज्वलित कर दिया। उस ऐतिहासिक क्षण में कुंभ केवल संगम नहीं रहा। कौशल्या नंद गिरी की तेजस्वी उपस्थिति ने कुंभ को चेतना, करुणा और सम्मान का विराट मंच बना दिया। हर ओर आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रवाह था और हर हृदय कौशल्या नंद गिरी के तेज से आलोकित होता प्रतीत हो रहा था। कौशल्या नंद गिरी के नेतृत्व में गूंजा यह स्वर कुंभ के इतिहास में अमिट छाप छोड़ गया। आने वाली पीढ़ियां जब भी इस कुंभ को स्मरण करेंगी, तब कौशल्या नंद गिरी का नाम आस्था, साहस और सनातन समरसता के प्रतीक के रूप में सदा स्मरण किया जाएगा।

REPORT – SALMAN KHAN
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