At the confluence of the rivers, Kaushalya Nand Giri’s resolve resonated, a grand festival of faith and self-respect. – BBC India News 24
23/01/26
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At the confluence of the rivers, Kaushalya Nand Giri’s resolve resonated, a grand festival of faith and self-respect.

संगम में गूंजा कौशल्या नंद गिरी का संकल्प, आस्था और आत्मसम्मान का महापर्व

प्रयागराज –मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम तट एक ऐसे ऐतिहासिक दृश्य का साक्षी बना, जहाँ सनातनी किन्नर अखाड़ा ने आवाहन अखाड़ा के साथ पूरे वैभव और गरिमा के साथ संगम स्नान किया। इस दिव्य क्षण की केंद्रबिंदु रहीं महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरी, जिनका नाम, नेतृत्व और संकल्प हर कदम पर दिखाई दिया। कौशल्या नंद गिरी के मार्गदर्शन में सैकड़ों किन्नर साधु-संन्यासी आस्था की डुबकी लगाने संगम की ओर बढ़े।ढोल-नगाड़ों की गूंज, हर-हर महादेव के जयघोष और तलवारबाजी के भव्य प्रदर्शन के बीच कौशल्या नंद गिरी की उपस्थिति ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया। तलवारों की चमक केवल शौर्य नहीं, बल्कि कौशल्या नंद गिरी के उस संदेश का प्रतीक थी—कि किन्नर समाज सनातन परंपरा में सम्मान के साथ खड़ा है। संगम की लहरों में स्नान करते हुए कौशल्या नंद गिरी का आत्मविश्वास और श्रद्धा देखने योग्य थी। स्नान उपरांत कौशल्या नंद गिरी ने भावुक स्वर में कहा कि यह क्षण किन्नर समाज के लिए आत्मसम्मान, स्वीकार्यता और आध्यात्मिक विजय का प्रतीक है। कौशल्या नंद गिरी ने दोहराया कि सनातनी किन्नर अखाड़ा भक्ति, तप और त्याग की उस परंपरा को आगे बढ़ा रहा है, जिसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं। संगम तट पर उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखों में सम्मान और भावुकता झलक रही थी। हर ओर कौशल्या नंद गिरी का नाम गूंज रहा था—एक ऐसे नेतृत्व का नाम, जिसने आस्था को आवाज दी, परंपरा को नई दिशा दी और इतिहास के पन्नों पर किन्नर समाज का स्वर्णिम अध्याय अंकित कर दिया।

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