ममता की मिसाल बनीं कौशल्या माँ, 41वें किन्नर बच्चे को दिया मातृत्व का आंचल
प्रयागराज, उत्तरप्रदेश – ममता, करुणा और अपनत्व की अद्भुत मिसाल पेश करते हुए आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरि”टीना मां” ने एक बार फिर समाज को मानवता का संदेश दिया है। पहले से 40 किन्नर बच्चों का पालन-पोषण कर रहीं कौशल्या माँ ने अब एक और जन्मजात किन्नर नवजात शिशु को अपनी गोद में लेकर उसे नया जीवन, नया नाम और नई पहचान दी है। उनके इस कदम की हर ओर सराहना हो रही है,जानकारी के अनुसार प्रयागराज से बाहर के एक जिले में 4-5 दिन पूर्व एक जन्मजात किन्नर बच्चे का जन्म हुआ। बच्चे के परिवार ने सामाजिक परिस्थितियों, आर्थिक कठिनाइयों और भविष्य की चिंता के चलते उसके पालन-पोषण में असमर्थता जताई। काफी सोच-विचार के बाद परिजन कौशल्या माँ के आवास पहुंचे और उनसे बच्चे को अपनाने की विनती की। कौशल्या माँ ने बिना किसी भेदभाव और हिचकिचाहट के उस मासूम को अपनी गोद में उठा लिया। विधिवत लिखापढ़ी और लोगों की मौजूदगी में बच्चे को अंगीकृत करते हुए उन्होंने उसे अपना नाम दिया। इस दौरान मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। कौशल्या माँ ने कहा कि “हर बच्चा भगवान का स्वरूप होता है। किसी बच्चे को उसकी पहचान के कारण त्यागना नहीं चाहिए, बल्कि उसे प्यार और सम्मान मिलना चाहिए। “उन्होंने बच्चे के बेहतर भविष्य का संकल्प लेते हुए कहा कि वह उसे अच्छी शिक्षा देंगी और समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने योग्य बनाएंगी। उनका सपना है कि यह बच्चा पढ़-लिखकर एक जिम्मेदार और सम्मानित नागरिक बने, यहां तक कि वह उसे आईएएस अधिकारी बनाने का प्रयास करेंगी। कौशल्या माँ का यह मातृत्व केवल एक बच्चे को सहारा देना नहीं, बल्कि समाज को संवेदनशीलता, समानता और मानवता का संदेश देना है। परिवार के अनुरोध पर बच्चे और उसके परिजनों की पहचान गोपनीय रखी गई है।

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