करंजाकला ब्लॉक में ‘प्रॉक्सी ब्लॉक प्रमुख’ का पर्दाफाश, RTI से उजागर हुआ बड़ा प्रशासनिक घोटाला – BBC India News 24
03/01/26
Breaking News

करंजाकला ब्लॉक में ‘प्रॉक्सी ब्लॉक प्रमुख’ का पर्दाफाश, RTI से उजागर हुआ बड़ा प्रशासनिक घोटाला

जौनपुर, उत्तर प्रदेश

जनपद जौनपुर के विकास खंड करंजाकला में लोकतंत्र और शासन प्रणाली को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। ब्लॉक प्रमुख के नाम पर एक अनधिकृत व्यक्ति द्वारा शासकीय मंचों पर अधिकारपूर्वक बैठना और उद्घाटन करना न सिर्फ शासन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि संविधान की आत्मा के साथ भी एक बड़ा विश्वासघात है।

प्रेस विज्ञप्ति ने किया भ्रमित, अनधिकृत व्यक्ति को बताया “ब्लॉक प्रमुख”

दिनांक 3 नवम्बर 2024 को एक प्रमुख हिंदी दैनिक में प्रकाशित एक तस्वीर में सुनील यादव उर्फ मम्मन नामक व्यक्ति को एक शासकीय कार्यक्रम में “ब्लॉक प्रमुख” के रूप में फीता काटते हुए दिखाया गया। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारी भी मंच पर उपस्थित थे, और जारी की गई सरकारी प्रेस विज्ञप्ति में सुनील यादव को “ब्लॉक प्रमुख” कहा गया।

इस पर कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने सवाल उठाए। आखिर किस अधिकार से यह व्यक्ति एक निर्वाचित पद की भूमिका निभा रहा था?

RTI ने खोली सच्चाई की परतें

सूचना अधिकार यूनिक फोर्स के जिला अध्यक्ष श्री अजय कुमार यादव द्वारा दायर सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त जवाब ने इस पूरे प्रकरण की असलियत उजागर कर दी। खंड विकास अधिकारी, करंजाकला ने उत्तर में स्पष्ट किया कि—

वर्तमान निर्वाचित ब्लॉक प्रमुख श्रीमती पूनम यादव पत्नी श्री मनोज कुमार यादव हैं, और पंचायत राज अधिनियम में किसी भीमात्रक प्रतिनिधिया अनधिकृत व्यक्ति को प्रमुख के कार्य करने का अधिकार नहीं है। सभी कार्य निर्वाचित प्रतिनिधि को ही संपन्न करने होते हैं।

क्या यह महिला आरक्षण की खुली अवहेलना नहीं?

यह मामला संविधान में निहित महिला आरक्षण (अनुच्छेद 243D) की भावना के साथ खिलवाड़ प्रतीत होता है। जब निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि मौजूद हैं, तो पुरुष व्यक्ति द्वारा उनके स्थान पर ब्लॉक प्रमुख का कार्य करना अपने आप में एक संवैधानिक उल्लंघन, प्रॉक्सी शासन और लोकतांत्रिक धोखाधड़ी है।

प्रशासन मौन, जिम्मेदार कौन?

इस गंभीर मामले में अभी तक न तो प्रशासन की ओर से कोई स्पष्टीकरण आया है और न ही दोषियों पर कोई कार्यवाही हुई है। कार्यक्रम में मंच साझा करने वाले अधिकारी क्या इस प्रॉक्सी सत्ता से अनभिज्ञ थे, या उन्होंने जानबूझकर आँख मूँद ली?

कानूनी धाराओं के घेरे में मामला

विधिक जानकारों का कहना है कि यह प्रकरण भारतीय न्याय संहिता की धारा, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा, एवं पंचायती राज अधिनियम की धाराओ के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। यदि उचित समय पर कार्यवाही नहीं हुई, तो यह एक खतरनाक मिसाल बन सकती है।

क्या कहती है स्थानीय जनता?

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसकी निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की मांग की है। कई लोगों का कहना है कि “महिला आरक्षण” के नाम पर आज भी पर्दे के पीछे असली सत्ता प्रॉक्सी प्रतिनिधियों के हाथ में है, और यह न सिर्फ महिलाओं का अपमान है, बल्कि लोकतंत्र का भी अपहरण है।

जांच की मांग जोर पकड़ रही है, अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है  किया जाएगा न्याय या रहेगा यह मामला भी फाइलों में दफन?

Check Also

PM Modi and CM Yogi have given many rights to women – Sneh Kumari Shukla

पीएम मोदी, सीएम योगी ने महिलाओं के बहुत सारे अधिकार दिए – स्नेह कुमारी शुक्ला …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *