जौनपुर। सुरेरी
सरकार जहां पर्यावरण संरक्षण, हरित प्रदेश और कार्बन न्यूट्रलिटी जैसे बड़े लक्ष्यों की बात करती है, वहीं जौनपुर जिले में हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई लगातार बढ़ती जा रही है। मुख्य मार्गों, चौराहों और सड़कों के किनारे वर्षों पुराने नीम और आम के पेड़ों पर बिना अनुमति कुल्हाड़ी चल रही है। ताज़ा मामला थाना सुरेरी क्षेत्र के ग्रामसभा पाल्हनपुर चौराहे का है, जहाँ जीवित और स्वस्थ नीम के पेड़ों को खुलेआम काटा जा रहा है ।
सूत्रों की मानें तो यह पूरा अवैध खेल ठेकेदार भरत यादव द्वारा संचालित किया जा रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस अवैध कटाई में थाना सुरेरी प्रभारी राजेश मिश्रा की कथित शह होने की बात भी सामने आ रही है। आरोप यह है कि जिनकी जिम्मेदारी कानून व्यवस्था बनाए रखने और अवैध गतिविधियों को रोकने की है, वही आंखें मूंदे बैठे हैं। पुलिस की इस चुप्पी ने पूरे मामले को और भी संदिग्ध बना दिया है और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पेड़ कटाई पर लागू नियम बेहद स्पष्ट हैं। वन संरक्षण अधिनियम 1980, उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम, और स्थानीय निकायों की उपविधियों के तहत किसी भी नीम आदि के पेड़ को काटने से पहले सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति अनिवार्य है। इन कानूनों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना, एफआईआर दर्ज होने से लेकर जेल तक का प्रावधान है। इसके बावजूद सुरेरी क्षेत्र में न तो अनुमति ली जा रही है और न ही विभागीय स्तर पर कोई जाँच की जा रही है। अवैध कटाई की शिकायतें कई बार सोशल मीडिया—X (ट्विटर), आदि माध्यमों पर टैग की जाती है, लेकिन विभागों की चुप्पी ने भ्रष्टाचार और मनमानी की पोल खोल दी है। वन विभाग, स्थानीय निकाय, राजस्व विभाग और पुलिस—सभी की निष्क्रियता अवैध कटाई को खुला संरक्षण दे रही है।
नीम आदि के पेड़ पर्यावरण के लिए किसी फेफड़े से कम नहीं होते। नीम अपनी औषधीय गुणों और वायु शोधन क्षमता के लिए जाना जाता है। धूल रोकने और प्रदूषण कम करने में यह प्राकृतिक ढाल की तरह काम करता है। वहीं आम के विशाल और घने पेड़ स्थानीय तापमान को नियंत्रित रखते हैं, छाया देते हैं और जलवायु संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वृक्षों (पेड़) की अनियंत्रित कटाई से स्थानीय तापमान में बढ़ोतरी, धूल-धुआं में वृद्धि, वर्षा में कमी और भूजल स्तर पर प्रतिकूल असर पड़ना निश्चित है। यही कारण है कि विशेषज्ञ इसे आने वाले वर्षों के लिए गंभीर पर्यावरणीय संकट की चेतावनी मान रहे हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि शिकायतों के बावजूद न कोई सर्वे किया गया जाता है , न कोई जांच टीम भेजी जाती है और न ही कटाई रोकने के लिए कोई कार्रवाई की जाती है। अधिकारियों की यह चुप्पी न केवल उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि अवैध कटाई करने वालों का मनोबल भी बढ़ा रही है।
प्रशासन से तत्काल मांग की जा रही है कि पाल्हनपुर चौराहे की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, अवैध कटाई में शामिल ठेकेदार भरत यादव सहित सभी संबंधित लोगों पर कठोर कार्रवाई हो, और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाए।
पेड़ों की कटाई केवल कानून का उल्लंघन नहीं है—यह प्रकृति, समाज और आने वाली पीढ़ियों के साथ सीधा विश्वासघात है।
ब्रेकिंग न्यूज़, 07/11/2025
“सुरेरी पुलिस एक्शन में”
थाना सुरेरी की बड़ी कारवाही, ग्राम सभा पाल्हनपुर चौराहे पर हरे – भरे पेड़ काटने वाले अभियुक्त को लिया हिरासत में। पुलिस की चल रही अग्रिम कार्यवाही।
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