जौनपुर/ सुरेरी पुलिस छिनैती और वसूली के मामलों में धुरंधर, इनके भ्रष्टाचार और उत्पीड़न का कोई ओर-छोर नहीं। – BBC India News 24
27/09/26
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जौनपुर/ सुरेरी पुलिस छिनैती और वसूली के मामलों में धुरंधर, इनके भ्रष्टाचार और उत्पीड़न का कोई ओर-छोर नहीं।

जौनपुर में थाना सुरेरी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, वसूली से लेकर फर्जी मुकदमों तक उठ रहे बड़े सवाल

जौनपुर। थाना सुरेरी इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर लगातार चर्चा में है। थाने से जुड़े हालिया मामलों ने पुलिस की कार्यशैली, हिरासत में लिए गए लोगों के साथ व्यवहार और कथित वसूली की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थिति यह है कि सुरेरी थाने से जुड़े मामलों में अब थाने के पुलिसकर्मियों पर मुकदमे दर्ज होने, निलंबन और गिरफ्तारी तक की कार्रवाई सामने आ चुकी है। तो सोचिए सुरेरी पुलिस कितनी ईमानदार होगी। हालिया घटनाक्रम में एक व्यक्ति को कथित तौर पर सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी बताकर सुरेरी थाने ले जाने, अवैध असलहा पकड़ाकर वीडियो बनाने, मुकदमे में फंसाने की धमकी देने और रुपये की मांग करने का मामला सामने आया। इस मामले में पुलिसकर्मियों के खिलाफ अपहरण, लूट और जबरन वसूली सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार उससे नकद रकम लेने के साथ-साथ मोबाइल से यूपीआई के जरिए भी रकम ट्रांसफर कराई गई। सुरेरी पुलिस मारपीट करने ने एकदम माहिर है, मोबाइल और यूपीआई की जानकारी लेकर खाते से रकम ट्रांसफर कराने तथा एटीएम से पैसे निकलवाने की शिकायत सामने आई। पुलिस की जांच के बाद दो निलंबित कांस्टेबलों समेत कई लोगों की गिरफ्तारी की खबर सामने आई और मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम गठित की गई। मामला यहीं नहीं रुका। सुरेरी के तत्कालीन भ्रष्ट थाना प्रभारी दिव्य प्रकाश सिंह को निलंबित किया गया और बाद में उनके खिलाफ गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई। इन घटनाओं ने उस पूरे तंत्र पर सवाल खड़ा कर दिया है, जिसमें किसी आम व्यक्ति को पुलिस की मदद के लिए थाने का दरवाजा खटखटाना पड़ता है। सुरेरी पुलिस चंद पैसों के लिए किस हद तक गिर जाए इसकी कोई भरोसा नहीं, बता दे आपको कई मामलों में सुनवाई से लेकर कार्रवाई तक के नाम पर पैसे की मांग की जाती है। आरोप यह भी हैं कि लोगों को मुकदमे में फंसाने, आरोपियों को पकड़ने के लिए दबिश देने, एफआईआर दर्ज कराने अथवा थाने में बैठाकर कार्रवाई करने के नाम पर रकम ली जाती है। शिकायतों में यह भी सामने आता रहा है कि कभी-कभी लोगों से ऑनलाइन भुगतान कराया जाता है। इसके लिए सीधे पुलिसकर्मी के खाते के बजाय किसी अन्य व्यक्ति या जनसेवा केंद्र के माध्यम से रकम पहुंचाने का रास्ता अपनाया जाता है, ताकि लेनदेन का सीधा संबंध थाने से दिखाई न दे, लेकिन इनकी भ्रष्टाचार और चोरी पकड़ी जाती है।

सुरेरी पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर पत्रकारों से जुड़े मामले भी सवालों के घेरे में रहे हैं। निष्पक्ष खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकारों पर मुकदमे दर्ज करने, नोटिस (गुण्डाएक्ट) भेजने, दबाव बनाने तथा उनके खिलाफ कार्रवाई की कोशिश किए जाने जैसे आरोप सामने आते रहे हैं। यदि किसी पत्रकार द्वारा पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया जाता है तो उसके बाद उसके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी जाती है, यहां तक सुरेरी पुलिस पत्रकार से मारपीट पर उतारू हो जाती है, बता दे आपको करोना काल के समय भ्रष्ट घूसखोर बेशर्मी दरोगा राम जनम यादव ने एक पत्रकार की मोबाइल छीन लेता है, जिसकी लिखित शिकायत की गई न तो कार्यवाही हुई न ही मोबाइल दिया गया।

जबकि ऐसी घटना प्रकाश में आ चुका है। और यही नहीं सुरेरी थाने से लेकर सुरेरी चौकी पर तैनात कर्मचारियों की निगाह केवल शिकायत करता पर गड़ी रहती है कि कोई बेवस्था आज का बन जाए तेल पानी का ,

इसी तरह भूमि विवादों में पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। जमीन पर कब्जे के मामलों में पुलिस की भूमिका क्या होनी चाहिए और राजस्व से जुड़े मामलों में पुलिस किस सीमा तक हस्तक्षेप कर सकती है—इसकी भी निष्पक्ष जांच जरूरी है। लगातार अवैध खनन और मादक पदार्थों की कथित बिक्री जैसे मामलों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सुरेरी थाना क्षेत्र में वर्षों से चोरी, अवैध वसूली, जमीन विवाद, अवैध खनन और अन्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं, तो उनकी निष्पक्ष समीक्षा क्यों नहीं की जाती? थाने में दर्ज मुकदमों, विवेचनाओं, बरामदगी, दबिश, गिरफ्तारी और संबंधित शिकायतों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। जनता को पुलिस से सुरक्षा और न्याय की उम्मीद होती है, भय और वसूली की नहीं। पुलिस जनता की सेवा और कानून लागू करने के लिए है। यदि किसी पुलिसकर्मी द्वारा पद का दुरुपयोग कर किसी निर्दोष व्यक्ति को डराया, धमकाया, अवैध रूप से हिरासत में रखा या उससे धन लिया जाता है तो यह केवल एक व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल है। सुरेरी से जुड़े हालिया मामलों में जिस तरह एफआईआर दर्ज हुई, एसआईटी गठित हुई, पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी हुई और थाना प्रभारी के खिलाफ निलंबन तथा गिरफ्तारी की कार्रवाई सामने आई, उससे यह स्पष्ट है कि अब मामले को गंभीरता से लिया गया है। अब जरूरत इस बात की है कि सुरेरी थाने से जुड़े पुराने मामलों की भी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय समीक्षा हो। किस मामले में किस अधिकारी ने क्या कार्रवाई की, किसे हिरासत में लिया गया, किसके मोबाइल या खाते से रकम ट्रांसफर हुई, थाने की सीसीटीवी फुटेज में क्या दर्ज है, किस शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई और किस मामले में कार्रवाई नहीं हुई—इन सभी बिंदुओं की जांच होनी चाहिए।

सवाल सिर्फ सुरेरी थाने का नहीं, पुलिस व्यवस्था पर जनता के भरोसे का है। अगर पुलिस ही आम आदमी के लिए डर का कारण बन जाए तो कानून के राज की अवधारणा कमजोर होती है। इसलिए सुरेरी थाने से जुड़े प्रत्येक गंभीर मामले की निष्पक्ष जांच, दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई और निर्दोष लोगों को न्याय दिलाना जरूरी है।

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