जनपद जौनपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, मड़ियाहूं में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति उस समय सामने आई, जब जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने आज औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कागजी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला, जिससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए।
डीएम ने ओपीडी, इमरजेंसी कक्ष, दवा काउंटर, लैब, स्टोर रूम सहित विभिन्न विभागों का निरीक्षण किया। इस दौरान कई मरीजों ने इलाज में देरी, समुचित जानकारी के अभाव और कर्मचारियों के असंवेदनशील व्यवहार की शिकायतें कीं। साफ-सफाई की स्थिति भी कई स्थानों पर संतोषजनक नहीं पाई गई, जिससे मरीजों और तीमारदारों में असंतोष दिखा।
लैब कक्ष के निरीक्षण के दौरान जब जिलाधिकारी ने प्रतिदिन होने वाली जांचों की संख्या के बारे में जानकारी मांगी, तो प्रस्तुत आंकड़ों में स्पष्टता का अभाव नजर आया। इससे यह संकेत मिला कि अभिलेखों का रख-रखाव व्यवस्थित नहीं है और वास्तविक कार्यों का समुचित रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा।
जिलाधिकारी ने चिकित्सकों से संस्थागत प्रसव, गर्भवती महिलाओं को दिए जाने वाले भोजन और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली। जवाबों से यह स्पष्ट हुआ कि योजनाएं तो मौजूद हैं, लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन कमजोर है।
निरीक्षण के दौरान डीएम ने स्वास्थ्य कर्मियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि मरीजों के साथ संवेदनशीलता और शालीनता से व्यवहार किया जाए तथा समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण उपचार हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि
क्या यह औचक निरीक्षण केवल एक दिन की सक्रियता बनकर रह जाएगा,
या फिर सीएचसी मड़ियाहूं की बदहाल व्यवस्थाओं में वास्तविक सुधार देखने को मिलेगा?
इसका जवाब आने वाले दिनों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति तय करेगी।
BBC India News 24 wwwbbcindianews24.com