विशेष संवाददाता ,
जौनपुर (उत्तर प्रदेश) उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले का सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय (ARTO) इन दिनों भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और प्रशासनिक अराजकता का मुख्य केंद्र बन चुका है। आम जनता की सहूलियत के लिए बनाया गया यह विभाग अब दलालों और भ्रष्ट अधिकारियों के सिंडिकेट के दम पर चल रहा है। आलम यह है कि नियमों को ताक पर रखकर बिना रिश्वत के किसी भी नागरिक का नया ड्राइविंग लाइसेंस बनना या पुराने का नवीनीकरण होना लगभग नामुमकिन हो गया है।
इस गंभीर और जनहित से जुड़े मामले को लेकर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के जौनपुर दीपचन्द यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर इस पूरे रैकेट की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
‘हुनर‘ फेल, ‘रिश्वत‘ पास: जेब गर्म तो बिना टेस्ट के मिलेगा लाइसेंस
शिकायती पत्र में लगाए गए आरोपों के मुताबिक, जौनपुर ARTO कार्यालय में योग्यता और नियमों का कोई मोल नहीं रह गया है। कार्यालय का सीधा और क्रूर नियम है—“अभ्यर्थी को गाड़ी चलाने आती है या नहीं, यह मायने नहीं रखता; मायने रखती है तो सिर्फ उसकी जेब में रखे पैसों की खनक।“
यदि कोई अभ्यर्थी योग्य है, उसे गाड़ी चलानी आती है, लेकिन वह रिश्वत देने से इनकार करता है, तो उसे नियमों का हवाला देकर सिर्फ दफ्तर के चक्कर काटने पर मजबूर कर दिया जाता है। इसके विपरीत, यदि कोई अयोग्य व्यक्ति विभागीय लोगों की जेबें गर्म कर देता है, तो उसकी तमाम कमियों को नजरअंदाज कर तय समय पर उसका ड्राइविंग लाइसेंस उसके हाथ में सौंप दिया जाता है।
प्राइवेट गुर्गों के हवाले सरकारी दस्तावेज: गोपनीयता दांव पर
इस पूरे खेल में सबसे चौंकाने वाला खुलासा कार्यालय में सक्रिय ‘प्राइवेट कर्मचारियों‘ को लेकर हुआ है। ARTO, संबंधित पटल के लिपिक (बाबू) और संभागीय निरीक्षक (R.I.) की आपसी सांठ-गांठ से कार्यालय में कई अनाधिकृत प्राइवेट लोगों को तैनात किया गया है। ये प्राइवेट व्यक्ति ही अवैध वसूली के मुख्य माध्यम हैं।
बड़ा सवाल: शासकीय गोपनीयता अधिनियम और सेवा नियमावली की धज्जियां उड़ाते हुए इन बाहरी और गैर-सरकारी लोगों को सरकारी फाइलों और प्रलेखों तक सीधी पहुंच क्यों दी गई है?
सड़कों पर दौड़ रहे ‘अयोग्य‘ चालक, दांव पर निर्दोषों की जिंदगी
यह भ्रष्टाचार सिर्फ आर्थिक लूट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम जनमानस के ‘जीवन के अधिकार‘ (अनुच्छेद 21) पर हमला है। बिना उचित परीक्षण और बिना योग्यता के अवैध रूप से जारी हो रहे लाइसेंसों के कारण अयोग्य चालक सड़कों पर वाहन दौड़ा रहे हैं। यही वजह है कि जिले में आए दिन भीषण सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें मासूम लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।
मुख्यमंत्री से निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग
पत्रकार दीपचन्द यादव ने सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाते हुए निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- निष्पक्ष जांच: जौनपुर आर.टी.ओ. कार्यालय में व्याप्त इस सुनियोजित भ्रष्टाचार और अवैध वसूली की जांच किसी स्वतंत्र उच्च स्तरीय एजेंसी से कराई जाए।
- कठोर कार्रवाई: जांच के बाद संलिप्त अधिकारियों, लिपिकों, आर.आई. और उनके द्वारा पाले गए अवैध प्राइवेट कर्मचारियों को चिन्हित किया जाए। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर चलने वाली उत्तर प्रदेश सरकार जौनपुर ARTO कार्यालय के इस संगठित सिंडिकेट पर कब और क्या कार्रवाई करती है।
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