जौनपुर। मुख्यमंत्री के आह्वान पर शुरू हुए ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत जौनपुर जनपद में सरकारी तंत्र और जनप्रतिनिधियों ने मिलकर भारी-भरकम पौधारोपण का दावा किया है। जिला प्रशासन से लेकर ग्राम पंचायतों तक, हर जगह ‘हरित क्रांति’ लाने की होड़ दिखाई दी।
आइए देखते हैं कि जनपद के अलग-अलग कोनों से इस अभियान की जमीनी हकीकत क्या रही:
1. सीड़ा (SIDA) और मछलीशहर: औषधीय पौधों पर ज़ोर
सीड़ा प्राधिकरण के उत्तरी सेक्टर में जिला प्रशासन और वन विभाग ने मिलकर ‘चरक वन’ की नींव रखी। यहाँ मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद श्रीमती सीमा द्विवेदी रहीं, जहाँ औषधीय पौधे लगाए गए।
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ज़मीनी पहल: मछलीशहर विकासखंड में एक अच्छी पहल देखने को मिली, जहाँ प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को सहजन (मोरिंगा) के पौधे बांटे गए। सहजन कुपोषण दूर करने में मददगार है, इसलिए यह वितरण सिर्फ पर्यावरण नहीं बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेहतर कदम है।
2. बदलापुर: सिर्फ लगाया नहीं, सुरक्षा का भी इंतज़ाम
अक्सर वृक्षारोपण अभियानों में पौधे लगाकर छोड़ दिए जाते हैं और वे मवेशियों का निवाला बन जाते हैं। लेकिन बदलापुर के मछली गांव में विधायक रमेश चंद्र मिश्र द्वारा 500 पौधों के रोपण के साथ एक सराहनीय काम देखा गया—पौधों की सुरक्षा के लिए बकायदा घेराबंदी (ट्री-गार्ड/फेंसिंग) कराई गई। अगर यह घेराबंदी टिकती है, तो यहाँ पौधों के जीवित रहने की दर (Survival Rate) सबसे अच्छी होगी।
3. जफराबाद: आंकड़ों में सबसे भारी
विकासखंड धर्मापुर की ग्राम पंचायत खटोलिया में जफराबाद विधायक जगदीश नारायण राय के नेतृत्व में रिकॉर्ड 2050 पौधे रोपे गए। संख्या के लिहाज से यह इस रिपोर्ट का सबसे बड़ा आंकड़ा है। अब देखना यह होगा कि इतने बड़े पैमाने पर लगाए गए पौधों की देखरेख के लिए ग्राम पंचायत क्या कदम उठाती है।
4. मुंगराबादशाहपुर: जनसहभागिता का मिला साथ
मुंगराबादशाहपुर नगर पालिका और सतहरिया ब्लॉक में अभियान का रूप थोड़ा अलग था। यहाँ नगर पालिका अध्यक्ष कपिल मुनि उमर वैश्य के नेतृत्व में केवल सरकारी कर्मचारी नहीं, बल्कि स्थानीय व्यापारी, सभासद, पत्रकार और आम जनता भी फावड़ा थामे नज़र आई। पर्यावरण को जनआंदोलन बनाने के लिहाज से यह एक सकारात्मक तस्वीर है।
5. सुजानगंज, मड़ियाहूँ और शाहगंज: वीआईपी मूवमेंट
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सुजानगंज (बेहलमपुर): यहाँ राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी के साथ महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्य मंत्री कृपाशंकर सिंह की मौजूदगी रही।
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मड़ियाहूँ (बल्लीपुर): विधायक डॉ. आर. के. पटेल की मौजूदगी में भारी वृक्षारोपण हुआ।
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शाहगंज (दीपाईपुर): विधायक रमेश सिंह ने खुद फावड़ा चलाकर तहसील क्षेत्र में अभियान की शुरुआत की।
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सिकरारा (चांदपुर): MLC बृजेश कुमार सिंह ‘प्रिंशू’ ने पौधारोपण कर ग्रामीण स्तर पर संदेश दिया।
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मुफ़्तीगंज (मेन्होरा): यहाँ पूर्व विधायक दिनेश चौधरी के साथ एसडीएम केराकत, डीडीओ और श्रम उपायुक्त जैसे बड़े अधिकारियों की फौज ज़मीन पर उतरी।
6. गुर्जर ताल: पर्यावरण के साथ जल संरक्षण
मत्स्य विभाग द्वारा गुर्जर ताल पर नोडल अधिकारी श्रीमती धन लक्ष्मी की मौजूदगी में किया गया पौधारोपण बेहद रणनीतिक है। जल स्रोतों (तालाबों/तालों) के किनारे पेड़ लगाने से जलभराव और मिट्टी का कटान रुकता है, जो पर्यावरण के लिए दोहरा फायदा है।
जमीनी हकीकत का निष्पक्ष विश्लेषण (Ground Reality Check)
सकारात्मक पक्ष: इस अभियान की सबसे अच्छी बात यह रही कि इसमें केवल वीआईपी (VIPs) चमचमाती गाड़ियों से उतरकर फोटो खिंचाने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सहजन के पौधों का वितरण, बदलापुर में की गई घेराबंदी और मुंगराबादशाहपुर में आम जनता का जुड़ना यह दिखाता है कि जमीन पर काम करने की कोशिश की गई है।
आगामी चुनौती: जौनपुर प्रशासन ने पौधे तो लाखों की संख्या में रोप दिए हैं, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होगी। जून-जुलाई की गर्मी और बारिश के बाद इन पौधों को पानी देना, मवेशियों से बचाना और इन्हें ‘पेड़’ बनने तक ज़िंदा रखना सबसे बड़ी चुनौती है।


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