जौनपुर: सुरेरी पावर हाउस के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए नियम-कायदे ठेंगे पर! बिजली संकट से जूझते गांव, विभागीय जवाबदेही की मांग तेज
कोचारी, अडियार, मलेथू, हीरापट्टी समेत कई गांवों में अनियमित आपूर्ति से जनजीवन प्रभावित, शिकायतों के बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं
स्थलीय निरीक्षण में सामने आई अव्यवस्था पर विभाग से जवाबदेही तय करने की मांग
जौनपुर/रामपुर। रामपुर ब्लॉक के सुरेरी पावर हाउस से जुड़े कोचारी, अडियार, मलेथू, हीरा पट्टी समेत आसपास के गांवों में विद्युत आपूर्ति की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र की स्थिति का संगठन एवं पत्रकारों की टीम द्वारा मौके पर निरीक्षण किए जाने के दौरान विद्युत आपूर्ति की अनियमितता और लगातार बिजली कटौती से जुड़ी शिकायतें सामने आईं। स्थिति यह है कि रात के समय बिजली की उपलब्धता बेहद सीमित रहने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
निरीक्षण के दौरान सामने आई स्थिति और प्राप्त शिकायतों से यह प्रश्न उठता है कि आखिर संबंधित विद्युत अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा अपने क्षेत्र की आपूर्ति व्यवस्था की नियमित निगरानी किस स्तर पर की जा रही है। रात में घंटों बिजली गुल, जिम्मेदार अधिकारी मौन क्यों? क्षेत्र में रात के समय बिजली के बार-बार आने-जाने और लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने की शिकायतें सामने आई हैं। कई स्थानों पर बिजली उपलब्धता बेहद कम रहने की बात सामने आई। इसका सीधा असर घरेलू कामकाज, बच्चों की पढ़ाई, पानी की व्यवस्था और रात के सामान्य जीवन पर पड़ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी फीडर या लाइन में लगातार समस्या बनी हुई है तो उसका स्थायी तकनीकी समाधान क्यों नहीं किया जा रहा है?
क्या विभाग के पास फीडरवार कटौती, ट्रिपिंग और फाल्ट का रिकॉर्ड उपलब्ध है? यदि उपलब्ध है तो उस रिकॉर्ड के आधार पर बार-बार होने वाली समस्या की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही? और यदि रिकॉर्ड में आपूर्ति सामान्य दिखाई जा रही है, तो मौके की वास्तविक स्थिति उससे अलग क्यों नजर आ रही है?
करीब 20 शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं—जवाबदेही किसकी?
विद्युत समस्या को लेकर करीब 20 बार शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। यदि शिकायतों की यह संख्या विभागीय रिकॉर्ड से भी प्रमाणित होती है, तो यह अत्यंत गंभीर प्रशासनिक प्रश्न है कि इतनी शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ।
इन सवालों का जवाब केवल मौखिक आश्वासन से नहीं, बल्कि शिकायत रजिस्टर, ऑनलाइन शिकायत रिकॉर्ड, फाल्ट लॉग और विभागीय कार्रवाई रिपोर्ट के आधार पर दिया जाना चाहिए।
सीयूजी नंबर की उपलब्धता पर भी सवाल
विद्युत आपूर्ति से संबंधित किसी भी आपात स्थिति में संबंधित अधिकारी से तत्काल संपर्क होना आवश्यक है। लेकिन क्षेत्र में संबंधित अधिकारी के सीयूजी नंबर पर संपर्क नहीं हो पाने की शिकायत सामने आई है।
यदि विभागीय सीयूजी नंबर वास्तव में नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहता है, तो यह केवल फोन न उठाने का मामला नहीं, बल्कि आपातकालीन विद्युत शिकायत प्रणाली की कार्यक्षमता पर गंभीर प्रश्न है। मान लीजिए रात में बिजली का तार टूटकर सड़क पर गिर जाए, विद्युत खंभा गिर जाए अथवा किसी लाइन में गंभीर फाल्ट हो जाए—ऐसी स्थिति में तत्काल सूचना किसे दी जाएगी? यदि जिम्मेदार अधिकारी का आधिकारिक नंबर ही उपलब्ध न हो तो आपात स्थिति में कार्रवाई की जिम्मेदारी किस अधिकारी की होगी?
विभाग को इस बिंदु पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
क्षेत्र में यह भी शिकायत सामने आई है कि आधिकारिक संपर्क के बजाय कुछ लोगों के पास निजी मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं। यदि ऐसा है तो विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि आधिकारिक सीयूजी नंबर की जगह निजी नंबर से विद्युत शिकायतें क्यों संचालित की जा रही हैं।
क्या विभाग ने इसके लिए कोई अधिकृत व्यवस्था बनाई है? यदि नहीं, तो आम उपभोक्ता को निजी नंबर पर निर्भर रहने की स्थिति क्यों पैदा हुई?
सरकार के बिजली आपूर्ति दावों और जमीनी स्थिति में अंतर क्यों?
सरकार और बिजली विभाग द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने की बात कही जाती है। ऐसे में यदि किसी क्षेत्र में वास्तविक आपूर्ति लगातार बाधित है तो विभागीय अधिकारियों को यह बताना चाहिए कि निर्धारित आपूर्ति और मौके की वास्तविक आपूर्ति में अंतर क्यों है। लेकिन हर बार केवल अस्थायी रूप से लाइन चालू कर देना स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। इस पूरे मामले में सवाल केवल लाइनमैन या स्थानीय कर्मचारी तक सीमित नहीं है। जिम्मेदारी संबंधित अवर अभियंता से लेकर उच्च स्तर के पर्यवेक्षण अधिकारियों तक तय होनी चाहिए।
यदि किसी क्षेत्र में लगातार विद्युत आपूर्ति बाधित रहती है और शिकायतें भी लगातार आती हैं, तो संबंधित अधिकारी द्वारा निरीक्षण, फीडर की समीक्षा और आवश्यक तकनीकी कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि यह सब रिकॉर्ड में होने के बावजूद समस्या जस की तस है तो विभागीय निगरानी व्यवस्था पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। मामले में अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि दस्तावेजी और स्थलीय जांच की आवश्यकता है। संबंधित उच्च अधिकारी पिछले कुछ समय की शिकायतों का रिकॉर्ड, फीडरवार आपूर्ति विवरण, ट्रिपिंग रिपोर्ट, फाल्ट लॉग, मरम्मत का रिकॉर्ड और सीयूजी नंबर की उपलब्धता की जांच कराएं।
यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही, ड्यूटी में शिथिलता अथवा निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई और जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
सरवरी पावर हाउस से जुड़े गांवों में बिजली व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों को अब नजरअंदाज करना आसान नहीं होना चाहिए। बिजली विभाग सार्वजनिक सेवा प्रदान करने वाला तंत्र है और उसके अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी केवल लाइन चालू कर देना नहीं, बल्कि सुरक्षित, नियमित और शिकायत-उत्तरदायी विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना भी है।
यदि करीब 20 शिकायतों के बाद भी समस्या बनी हुई है, आधिकारिक संपर्क व्यवस्था पर सवाल हैं और मौके की स्थिति लगातार खराब बताई जा रही है, तो विभागीय उच्चाधिकारियों को जांच कर यह सार्वजनिक करना चाहिए कि कमी कहां है, जिम्मेदार कौन है और सुधार के लिए क्या कार्रवाई की गई। अब सवाल बिजली विभाग से है—क्या सुरेरी पावर हाउस की व्यवस्था की निष्पक्ष जांच होगी, या शिकायतों और जमीनी हकीकत को इसी तरह नजरअंदाज किया जाता रहेगा? ग्रामीणों ने जनहितार्थ सामाजिक संगठन हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन से लगाए मदद की गुहार,और लापरवाह अधिकारियों /कर्मचारियों पर कार्रवाई करने की रखी बात
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