स्थान: नई दिल्ली | विशेष संवाददाता
दिनांक: 15 जुलाई 2025
भारत की राजधानी दिल्ली एक बार फिर सुनियोजित बम धमकी अफवाहों की चपेट में है, जिसने न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को चुनौती दी है, बल्कि विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाला है। इस सप्ताह, कई प्रतिष्ठित विद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों को ईमेल के माध्यम से बम विस्फोट की धमकियाँ प्राप्त हुईं, जिनके परिणामस्वरूप शिक्षण कार्य बाधित हुआ, संस्थानों को खाली कराया गया, और भय का वातावरण व्यापक रूप से व्याप्त हो गया।
तथ्यात्मक विवरण: एक सुनियोजित पैटर्न की पुनरावृत्ति
सोमवार, 14 जुलाई 2025 को नेवी चिल्ड्रन स्कूल (चाणक्यपुरी), सीआरपीएफ पब्लिक स्कूल (द्वारका) एवं सीआरपीएफ स्कूल (रोहिणी) को धमकी भरे ईमेल प्राप्त हुए, जिनमें कथित बम विस्फोट की चेतावनी दी गई थी। इसके 24 घंटे के भीतर, 15 जुलाई को सेंट थॉमस स्कूल (द्वारका) तथा दिल्ली विश्वविद्यालय का प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज भी निशाना बनाए गए। प्रत्येक घटना में दिल्ली पुलिस एवं बम निरोधक दस्तों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए परिसरों की तलाशी ली एवं उन्हें सुरक्षित घोषित किया। हालांकि सभी घटनाएँ ‘अफवाह’ सिद्ध हुईं, लेकिन इनका मनोवैज्ञानिक प्रभाव अत्यंत गम्भीर रहा है—विशेषकर छात्रों के बीच भय, परीक्षा अवरोध, एवं अभिभावकों में असुरक्षा की भावना तीव्र हुई है।
पृष्ठभूमि और दोहराव का प्रारूप
यह कोई आकस्मिक या पृथक घटना नहीं है। 2024 से अब तक दिल्ली में तीन बड़ी बम अफवाह लहरें आ चुकी हैं। मई 2024 की एक घटना में, एक ही दिन में 100 से अधिक स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि कई मामलों में धमकियाँ विदेशी आईपी एड्रेस से भेजी गईं, तो कुछ में यह पाया गया कि किशोर छात्रों द्वारा परीक्षाओं में विघ्न डालने की नीयत से यह कृत्य किया गया था। जनवरी 2024 में, कक्षा 12 के एक छात्र ने यह स्वीकार किया कि उसने परीक्षा स्थगित कराने के लिए बम धमकी भरा ईमेल भेजा था।
प्रशासनिक एवं विधिक प्रतिक्रिया: अस्पष्ट, बिखरी और निष्क्रिय
दिल्ली पुलिस द्वारा प्रारम्भिक जांच में वीपीएन, फर्जी ईमेल अकाउंट्स, और अंतर्राष्ट्रीय साइबर स्रोतों की जाँच की जा रही है। साइबर अपराध इकाई, CERT-In (भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम) एवं इंटरपोल के साथ समन्वय की बात कही जा रही है, किन्तु अब तक किसी ठोस गिरफ्तारी या निर्णायक परिणाम की घोषणा नहीं हुई है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस विषय पर फरवरी 2025 में स्वत: संज्ञान लेते हुए दिल्ली सरकार और पुलिस को निर्देश दिया था कि वे एक सुसंगत सुरक्षा नीति एवं अद्यतन मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करें। न्यायालय ने यह टिप्पणी की कि, “ये घटनाएँ अब अलग–थलग नहीं रह गई हैं—ये व्यवस्थित हो चुकी हैं, और इनके पीछे संभावित संगठित साइबर अपराधिक तत्त्व हैं।“इसके बावजूद, इस सप्ताह की घटनाओं से स्पष्ट है कि कोई व्यावहारिक सुधार नहीं हुआ है। SOP के अभाव में, प्रत्येक विद्यालय को स्वतः ही निर्णय लेना पड़ रहा है कि परिसर खाली किया जाए या नहीं, जिससे शैक्षणिक व प्रशासनिक अराजकता व्याप्त हो रही है।
राजनीतिक आरोप–प्रत्यारोप: उत्तरदायित्व का विखंडन
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने इन घटनाओं के लिए केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा— “दिल्ली में ये क्या हो रहा है? बच्चे डरे हुए हैं, अभिभावक चिंतित हैं और भाजपा की चार इंजन वाली सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है।“ वहीं, विपक्षी प्रवक्ता ने राज्य सरकार की साइबर सुरक्षा नीति को हास्यास्पद करार देते हुए कहा कि “दिल्ली सरकार के पास न नीति है, न संरचना।”
विधिक विमर्श: गंभीर अपराध या किशोर चेष्टा?
भारतीय दण्ड संहिता की धारा 505(1)(b) (सार्वजनिक शांति भंग करने हेतु झूठी सूचना देना), धारा 507 (गुमनाम धमकी देना), और आईटी अधिनियम की धारा 66F (साइबर आतंकवाद) जैसी धाराएँ इन कृत्यों पर लागू होती हैं। यदि अपराधी किशोर निकलते हैं, तो Juvenile Justice Act, 2015 के अंतर्गत विशेष प्रक्रियाएँ अपनाई जाएंगी, किन्तु उनकी गंभीरता को देखते हुए बाल अपचारी को व्यस्क के रूप में भी मुकदमा झेलना पड़ सकता है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा Shilpa Mittal v. State of NCT of Delhi (2020) में विवेचित किया गया है।
समाज पर प्रभाव: शैक्षणिक संस्थानों की अस्थिरता
बम धमकी चाहे अफवाह हो या नहीं, उसका उद्देश्य भय उत्पन्न करना होता है—और वह सफल हो रहा है। बच्चों का मनोबल, उनकी परीक्षा तैयारी, और शिक्षकों की कार्यशैली—सब बाधित हुए हैं। कई स्कूलों ने परीक्षा स्थगित कर दी, कुछ संस्थानों ने ऑन-कैमरा निगरानी और मेटल डिटेक्टर तक की तैनाती की।इस निरंतर भय के वातावरण ने भारत के सबसे सुरक्षित समझे जाने वाले स्थान—शैक्षणिक परिसरों—की सुरक्षा में जनता का विश्वास डगमगाया है।
असत्य संकट, वास्तविक भय
दिल्ली में बारंबार हो रही बम धमकियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यथास्थिति अस्थिर, अव्यवस्थित और अस्वीकार्य है। यह समय है कि:
- सरकारें आरोप से ऊपर उठकर संयुक्त रणनीति बनाएं,
- पुलिस एवं साइबर प्रकोष्ठ समन्वित और तकनीकी रूप से उन्नत जांच को अपनाएँ,
- और विद्यालयों को SOP की वैधानिक रूप से बाध्यकारी व्यवस्था प्रदान की जाए।
अफवाह चाहे हो या नहीं—यदि डर वास्तविक है, तो लोकतंत्र की नींव डगमगाती है।
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