जौनपुर/सुरेरी: रिश्वतखोरी पर उतरी पुलिस, अब ऑनलाइन रिश्वत की लेन देन, FIR के लिए पीड़ित से मांगे 24 हजार, आरोप – BBC India News 24
14/01/26

जौनपुर/सुरेरी: रिश्वतखोरी पर उतरी पुलिस, अब ऑनलाइन रिश्वत की लेन देन, FIR के लिए पीड़ित से मांगे 24 हजार, आरोप

जौनपुर/थाना सुरेरी: न्याय के बदले रिश्वत – FIR के नाम पर सिपाही ने वसूले 4 हजार, थाना प्रभारी के नाम पर मांगे 20 हजार

जौनपुर जिले के थाना सुरेरी में भ्रष्टाचार एक बार फिर खुलकर सामने आया है। ग्राम जमुआ निवासी गुलाबचंद यादव ने आरोप लगाया है कि उनके साथ मारपीट की घटना के बाद जब उन्होंने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने की कोशिश की, तो उनसे FIR के बदले 24 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई।

क्या है मामला?

गुलाबचंद यादव के अनुसार, नाली के पानी के बहाव को लेकर उनके विपक्षियों – अमरजीत यादव पुत्र स्व. शंकर यादव, मनीष यादव, दया यादव, चंदिका यादव, देवी मणि, मुकेश यादव, महेश यादव, बृजेश यादव, और भागीरथी यादव – ने उनके साथ मारपीट की, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं।

थाने में FIR के बदले रिश्वत की मांग:

गुलाबचंद जब थाना सुरेरी पहुंचे, तो उनकी FIR दर्ज नहीं की गई। कुछ देर बाद सिपाही विकाश कुमार ने उनसे कहा कि यदि वे पैसे दें, तो तुरंत कार्रवाई होगी। पीड़ित द्वारा विरोध करने पर सिपाही ने उन्हें डराया-धमकाया और कहा कि “बड़े साहब होते तो 50 हजार से कम नहीं लेते, तुम्हारा बहुत कम में निपटाया जा रहा है।”

बातचीत के बाद रिश्वत की रकम 24 हजार रुपये तय हुई, जिसमें से 4 हजार रुपये तत्काल और 20 हजार अगले दिन देने को कहा गया।

ऑनलाइन पेमेंट का दबाव:

सिपाही विकाश कुमार ने नकद नहीं, बल्कि फोन पे से भुगतान करने की बात कही। उन्होंने सुशील कुमार मौर्या नामक व्यक्ति का मोबाइल नंबर दिया और पीड़ित से उस पर 4 हजार रुपये भेजने को कहा। गुलाबचंद ने 3 अगस्त 2025 को 4,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए।

पड़ताल में सच आया सामने:

जब संवाददाता ने मामले की तहकीकात की, तो सुशील कुमार मौर्या से बातचीत में उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें 4 हजार रुपये मिले और यह पैसा सिपाही विकाश कुमार को दिया गया।

20 हजार किसके लिए?

सिपाही विकाश कुमार ने पीड़ित से स्पष्ट रूप से कहा कि “20 हजार तो बड़े साहब (थाना प्रभारी) को देना पड़ता है, तभी FIR और मेडिकल होगा।” इसका सीधा मतलब है कि थाना स्तर पर भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं और सिपाही से लेकर अधिकारी तक इसमें लिप्त हो सकते हैं।

पीड़ित की मांग:

इस मामले की निष्पक्ष जांच हो।

सिपाही विकाश कुमार और संबंधित थाना प्रभारी को तत्काल निलंबित किया जाए।

पीड़ित को न्याय और सुरक्षा प्रदान की जाए।

पुलिस व्यवस्था में सुधार और निगरानी की ठोस व्यवस्था लागू की जाए।

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