अयोध्या:
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट परिसर के भीतर श्रद्धालुओं के चढ़ावे और कीमती सामानों की चोरी के मामले की जांच कर रही अयोध्या पुलिस और एसआईटी (SIT) को बड़ी सफलता हाथ लगी है। स्थानीय अदालत द्वारा मुख्य आरोपियों की एक दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर किए जाने के बाद, पुलिस ने इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड माने जा रहे अनुकल्प मिश्रा, उसके साले लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय को जिला जेल से बाहर लाकर कड़ी पूछताछ की।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अनुकल्प मिश्रा की निशानदेही और उसके द्वारा कबूले गए बयानों के आधार पर पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए कई नए ठिकानों पर छापेमारी की है।
चाचा और स्थानीय सर्राफा कारोबारी (ज्वैलर) से पूछताछ
अनुकल्प मिश्रा से मिली गुप्त जानकारियों के आधार पर पुलिस की एक विशेष टीम सिविल ड्रेस (सादे कपड़ों) में इनायतनगर बाजार पहुंची। वहां पुलिस ने अनुकल्प के चाचा रामेंद्र मिश्रा और एक स्थानीय ज्वैलर (सर्राफा व्यापारी) को हिरासत में लेकर घंटों पूछताछ की। जांचकर्ताओं को संदेह है कि चोरी किए गए चढ़ावे के पैसों का एक हिस्सा सोने-चांदी के आभूषणों को खरीदने या उन्हें ठिकाने लगाने में इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा कुछ निर्माण सामग्री विक्रेताओं से भी पूछताछ की गई है, क्योंकि आरोपी द्वारा हाल ही में संपत्तियां खरीदने की बात सामने आई थी।
चोरी के पैसों से खड़ा किया ‘साम्राज्य’
जांच एजेंसियों के अनुसार, राम मंदिर ट्रस्ट में व्यवस्था कार्यकर्ता के तौर पर शामिल होने के बाद आरोपी अनुकल्प मिश्रा की जीवनशैली में अचानक बड़ा बदलाव आया था।
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बरामदगी: अनुकल्प मिश्रा के पास से अब तक कुल 16,82,040 रुपये की नकदी बरामद की जा चुकी है, जिसमें 500 और 200 रुपये के नोटों के बंडल शामिल थे।
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महंगी संपत्तियां: जांच में सामने आया है कि आरोपी ने चोरी के पैसों से एक आलीशान फार्महाउस, एक महंगी स्कॉर्पियो कार (मई 2025 में खरीदी गई) और करीब 65 लाख रुपये का एक नया मकान तैयार किया था। पुलिस अब उसकी बैंकिंग गतिविधियों और वित्तीय लेन-देन का फॉरेंसिक ऑडिट करवा रही है।
सीसीटीवी फुटेज और पहली तस्वीर आई सामने
इस मामले में पुलिस के हाथ सबसे मजबूत सबूत के तौर पर मंदिर के कैश काउंटिंग (नोटों की गिनती) रूम के भीतर की तस्वीरें और सीसीटीवी फुटेज लगे हैं।
हाल ही में सामने आई एक एक्सक्लूसिव तस्वीर में मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला और अनुकल्प मिश्रा मंदिर के उसी सुरक्षित रूम के अंदर दिखाई दे रहे हैं, जहां भक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान की गिनती की जाती थी।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी मॉनिटरिंग रूम की कमियों का फायदा उठाया। जब उन्हें अहसास हुआ कि शुरुआती दौर में कैमरों की लाइव फीड की लगातार निगरानी नहीं हो रही थी, तो उन्होंने बेखौफ होकर नोटों के बंडल और कीमती सामान गायब करना शुरू कर दिया।
अब तक कुल 8 गिरफ्तारियां और 79 लाख से ज्यादा की बरामदगी
एसआईटी और ट्रस्ट के सदस्य श्रीकृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज हुई इस एफआईआर के बाद अब तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें मुख्य साजिशकर्ता अविनाश शुक्ला (जिसने कथित तौर पर 40 दिनों में करीब 70 बार चोरी की), अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय, टिन्नू यादव, मनीष कुमार यादव, रमा शंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। पुलिस अब तक इन आरोपियों के पास से 79 लाख रुपये से अधिक की नकदी, विदेशी मुद्रा और सोने-चांदी के जेवरात बरामद कर चुकी है।
ट्रस्ट में बड़े प्रशासनिक बदलाव
इस बड़े घोटाले के सामने आने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट में भी भारी हड़कंप मचा हुआ है। नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा पहले ही अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं, ट्रस्ट ने विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव (गोपाल नागारकट्ठे) को भी बैठकों से हटा दिया है।
पुलिस और एसआईटी का कहना है कि रिमांड के दौरान मिले इनपुट्स के बाद आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी बरामदगियां और गिरफ्तारियां संभव हैं। भक्तों की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
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