अयोध्या राम मंदिर चोरी: अभेद्य सुरक्षा का ‘भ्रम’ टूटा, SIT रिपोर्ट ने खोली लापरवाही की पोल – BBC India News 24
13/07/26
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अयोध्या राम मंदिर चोरी: अभेद्य सुरक्षा का ‘भ्रम’ टूटा, SIT रिपोर्ट ने खोली लापरवाही की पोल

अयोध्या। करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र और देश के सबसे हाई-प्रोफाइल धार्मिक स्थलों में से एक—अयोध्या का भव्य राम मंदिर। दावा था कि यहाँ की सुरक्षा ‘परिंदा भी पर न मार सके’ जैसी त्रि-स्तरीय (Three-tier) और अभेद्य है। लेकिन हाल ही में हुई चोरी की घटना ने इस पूरे दावे की हवा निकाल दी है। इस बेहद संवेदनशील मामले की जांच कर रही SIT (विशेष जांच दल) ने जो अंतिम रिपोर्ट सौंपी है, वह बेहद परेशान करने वाली है। यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली जगह पर लापरवाही का ‘अंधेरा’ पसरा हुआ था।

यहाँ जानिए इस हकीकत का वह पहलू, जो सुरक्षा एजेंसियों की नाकामी को बयां करता है:

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SIT की जांच में किसी बाहरी शातिर गिरोह का नाम सामने नहीं आया है, बल्कि जो सच सामने आया है वह और भी डराने वाला है। चोरी की वजह कोई ‘हाई-टेक सेंधमारी’ नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था का खोखलापन थी:

  • जिस परिसर में प्रवेश के लिए आम श्रद्धालुओं को कई कड़े सुरक्षा चक्रों से गुजरना पड़ता है, वहाँ अंदर काम कर रहे संविदा कर्मचारियों और मजदूरों ने ही मंदिर को चूना लगा दिया। इन्हें सुरक्षा के ‘ब्लाइंड स्पॉट्स’ (जहाँ कैमरे नहीं देखते) और सुरक्षाकर्मियों की शिफ्ट बदलने के समय की सटीक जानकारी थी।
  • सुरक्षा एजेंसियों काअहंकारऔर तालमेल की कमी: राम मंदिर की सुरक्षा में यूपी पुलिस, एस.एस.एफ. (SSF) और निजी सुरक्षा एजेंसियां तैनात हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल (Coordination) शून्य था। हर एजेंसी अपनी जिम्मेदारी दूसरे पर टालने में लगी रही और इसी ‘कम्युनिकेशन गैप’ का फायदा चोरों ने उठाया।
  • शोपीस बने रहे करोड़ों के सी.सी.टी.वी. कैमरे: परिसर में कहने को तो सैकड़ों अत्याधुनिक कैमरे लगे हैं, लेकिन हकीकत यह थी कि वारदात के वक्त कंट्रोल रूम में बैठे ऑपरेटर या तो सो रहे थे या उनका ध्यान स्क्रीन पर नहीं था। कई कैमरों के एंगल जानबूझकर या लापरवाही से ऐसे थे, जो मुख्य रास्तों को कवर ही नहीं कर पा रहे थे।
  • शिफ्ट चेंज के नाम परमस्ती‘: जब सुरक्षाकर्मियों की शिफ्ट बदलती थी, तब पूरे परिसर की सुरक्षा राम भरोसे छोड़ दी जाती थी। चोरों को अच्छी तरह पता था कि इस दौरान कोई देखने वाला नहीं है।

हकीकत का आईना: अब जागे तो क्या जागे?

चोरी की घटना के बाद अब प्रशासन ‘जीरो टॉलरेंस’ और ‘सुरक्षा सख्त करने’ की बातें कर रहा है। SIT ने अब जो सिफारिशें दी हैं, वे असल में सुरक्षा एजेंसियों की पुरानी नाकामियों को ही दर्शाती हैं:

बड़ा सवाल: जो पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification) मंदिर निर्माण की शुरुआत में ही हर कर्मचारी का हो जाना चाहिए था, वह अब चोरी होने के बाद “अनिवार्य रूप से दोबारा” करने की बात कही जा रही है। क्या पहले वेरिफिकेशन में ढिलाई बरती गई थी?

कंट्रोल रूम की 24 घंटे लाइव ऑडिटिंग और सेंट्रल कमांड सेंटर को मजबूत करने की बातें अब हो रही हैं, यानी अब तक सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे ही चल रही थी।

क्या वाकई होगी सख्त कार्रवाई?

हालांकि, पुलिस का दावा है कि कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है और सामान की बरामदगी जारी है, लेकिन इस घटना ने राम मंदिर की सुरक्षा साख पर एक ऐसा दाग लगा दिया है जिसे धोना आसान नहीं होगा। वीवीआईपी सुरक्षा के दावों के बीच हुई इस मामूली चोरी ने साबित कर दिया है कि कागजी सुरक्षा कितनी भी मजबूत हो, अगर जमीन पर तैनात अमला लापरवाह हो, तो इतनी बड़ी चूक को टाला नहीं जा सकता। भविष्य में सुरक्षा कितनी कड़ी होगी, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इस घटना ने पूरे देश को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम वाकई इतने संवेदनशील धार्मिक स्थल की सुरक्षा को लेकर गंभीर थे?

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