सुरेरी पुलिस को रिश्वत की “गंभीर बीमारी” – पहले पैसे, फिर काम – BBC India News 24
04/03/26
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सुरेरी पुलिस को रिश्वत की “गंभीर बीमारी” – पहले पैसे, फिर काम

जौनपुर / थाना सुरेरी

थाना प्रभारी से लेकर सिपाही तक पर भ्रष्टाचार के आरोप, पीड़ित परेशान

जौनपुर जिले के थाना सुरेरी से भ्रष्टाचार की चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं। सुरेरी पुलिस अब न्याय नहीं, बल्कि “नकद” देखती है। बिना पैसे दिए न तो रिपोर्ट लिखी जाती है और न ही अपराधियों पर कोई सख्त कार्रवाई होती है।

थाने में पहले “बैठाओ नीति”, फिर “सुलह का दबाव”

जानकारी मुताबिक (सूत्र), जब कोई पीड़ित व्यक्ति रिपोर्ट दर्ज कराने सुरेरी थाने पहुंचता है, तो सबसे पहले घंटों थाने में बैठा दिया जाता है। इसके बाद पीड़ित पर यह दबाव बनाया जाता है कि “सुलह कर लो, मारपीट में कुछ नहीं रखा है।” यह सब इसलिए किया जाता है ताकि पीड़ित थक हारकर मामला खुद सुलझा ले — और पुलिस की जवाबदेही न बने।

नेताओं और अपराधियों के दबाव में पुलिस?

आरोप है कि पुलिस पर कुछ स्थानीय छोटभैये नेताओं और कुख्यात अपराधियों का दबाव होता है कि रिपोर्ट न लिखी जाए। और अगर किसी तरह मामला दर्ज भी किया जाता है, तो वह भी कैमरे से दूर ले जाकर, रिश्वत लेकर, और अपराधियों को बचाने वाली धाराओं में ही की जाती है।

“रिपोर्ट पीड़ित से नहीं, विपक्षी से लिखवाई जाती है”

बता दे आपको रिपोर्ट की भाषा इस तरह से बनाई जाती है ताकि अपराधियों पर गंभीर धाराएं न लगें। इसके बदले पुलिस विपक्षी पक्ष से भी “हिस्सा” लेती है। यह दोतरफा भ्रष्टाचार अब इलाके में आम चर्चा का विषय बन चुका है।

थाना प्रभारी पर गंभीर आरोप, भ्रष्टाचार का केंद्र बना सुरेरी थाना

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब से थाना प्रभारी राजेश मिश्रा की तैनाती हुई है, तब से रिश्वत की मांग और “रेट लिस्ट” दोनों बढ़ गए हैं। पीड़ित चाहे किसी भी चौकी या थाने पर जाएं, उनसे कहा जाता है — “पैसे दो, अपराधी को पकड़कर लाते हैं और पीटते हैं।” और इसमें थाना प्रभारी का भी हिस्सा तय होता है। थाने में तैनात हर कर्मचारी – दीवान से लेकर कांस्टेबल तक – अब पीड़ितों से “कमाई” के रास्ते खोज रहे हैं।

जनता का टूटा भरोसा, जिला स्तर पर जाने को मजबूर

अब हालत यह हो गई है कि जनता को न्याय पाने के लिए थाने नहीं, जिले या आरोपितों से सीधा समझौता करने के विकल्प ही बच रहे हैं। कई पीड़ितों का कहना है कि अब उन्हें सुरेरी पुलिस से नहीं, बल्कि उच्च अधिकारियों या मीडिया से ही उम्मीद है।

निष्कर्ष – वर्दी पर लगा काला धब्बा

सुरेरी पुलिस का यह रवैया पूरे विभाग की छवि को कलंकित कर रहा है। अब समय आ गया है कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई हो — ताकि आम जनता का भरोसा दोबारा कायम हो सके। सूत्रों –

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