सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय : यूपी के 45,000 पीआरडी जवानों को मिलेगा पुलिस व होमगार्ड के समान वेतनमान – BBC India News 24
23/01/26
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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय : यूपी के 45,000 पीआरडी जवानों को मिलेगा पुलिस व होमगार्ड के समान वेतनमान

नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च न्यायालय ने आज एक ऐतिहासिक व विधिक दृष्टि से दूरगामी प्रभाव डालने वाला निर्णय सुनाते हुए उत्तर प्रदेश के लगभग 45,000 प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) जवानों को राहत प्रदान की है। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को पूर्णतया बरकरार रखा है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि पीआरडी जवानों को राज्य पुलिस एवं होमगार्ड्स के समान वेतनमान दिया जाए। साथ ही, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई अपील को सर्वोच्च पीठ ने अस्वीकार कर दिया है।

सरकार की अपील निरस्त, सभी जवानों पर आदेश लागू राज्य सरकार ने यह तर्क प्रस्तुत किया था कि उच्च न्यायालय का आदेश केवल उन याचिकाकर्ताओं तक सीमित है जिन्होंने प्रत्यक्ष रूप से वाद प्रस्तुत किया था। परंतु, सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार की इस दलील को विधिसम्मत आधार पर खारिज करते हुए यह निर्देश दिया कि “समान कार्य, समान वेतन” की संवैधानिक अवधारणा का पालन करते हुए उक्त आदेश सभी 45,000 पीआरडी जवानों पर समान रूप से लागू होगा।

न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि एक ही श्रेणी व समान प्रकार का कार्य करने वाले सरकारी कर्मियों के मध्य वेतनमान में भेदभाव असंवैधानिक है और अनुच्छेद 14 तथा 39(डी) की भावना के प्रतिकूल है।

एक समान कार्य, एक समान वेतन का सिद्धांत पुनः पुष्ट पीआरडी जवानों का यह तर्क रहा कि वे वर्षों से कानून-व्यवस्था की रक्षा हेतु वही कर्तव्य निभा रहे हैं, जो पुलिस एवं होमगार्ड बलों के सदस्य निभाते हैं। उनकी जिम्मेदारियाँ, ड्यूटी के घंटे तथा कार्य का स्वरूप वस्तुतः समान है। ऐसे में उन्हें न्यूनतर वेतन देना संविधान सम्मत नहीं है।

वकील विनोद शर्मा ने जानकारी दी कि यह मुद्दा प्रारंभिक स्तर पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय तथा नैनीताल उच्च न्यायालय के समक्ष उठाया गया था। दोनों ही न्यायालयों ने यह पाया कि पीआरडी जवानों के साथ वित्तीय असमानता न्यायोचित नहीं है और उन्हें समान वेतनमान का अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश : अंतरिम अवधि में भी समान वेतन जारी सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी निर्देशित किया कि जब तक शासन द्वारा पूर्ण अनुपालन नहीं कर लिया जाता, तब तक सभी पीआरडी जवानों को पुलिस एवं होमगार्ड्स के समकक्ष वेतनमान दिया जाता रहेगा। यह आदेश न केवल स्थायी प्रभाव से लागू रहेगा बल्कि तत्कालीन स्तर पर भी न्यायसंगत वेतन सुनिश्चित करेगा। जवानों की वर्षों की लड़ाई को सफलता फैसले के उपरांत प्रदेशभर के पीआरडी जवानों में उल्लास और संतोष की लहर दौड़ गई। पीआरडी जवान संजय कुमार ने कहा – “आज हमें न्याय मिला है, यह केवल हमारा ही नहीं बल्कि हर जवान का हक है। यह फैसला हमारे मनोबल को कई गुना बढ़ा देगा।”
वहीं जवान राघवेन्द्र ने कहा – “हमने जो संघर्ष उच्च न्यायालय से शुरू किया था, उसका वास्तविक परिणाम आज सर्वोच्च न्यायालय से मिला है। यह हमारे वर्षों की कानूनी लड़ाई की ऐतिहासिक जीत है।”

विधिक दृष्टि से निर्णय का महत्व -: यह निर्णय केवल आर्थिक राहत भर नहीं है, बल्कि “समान कार्य हेतु समान वेतन” के संवैधानिक सिद्धांत को सर्वोच्च स्तर पर पुनः प्रतिष्ठित करता है। यह आदेश भावी सेवा विवादों एवं श्रमिक मामलों में भी एक अनुकरणीय दृष्टांत (precedent) के रूप में उद्धृत किया जाएगा।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला राज्य सरकारों को यह संदेश देता है कि समान कार्य करने वाले कर्मियों के बीच मनमाना भेदभाव करना अब संभव नहीं होगा। यह न केवल कर्मियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करेगा बल्कि शासन-प्रशासन की नीतिगत पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

निष्कर्षतः, सर्वोच्च न्यायालय का यह ऐतिहासिक निर्णय न केवल 45,000 पीआरडी जवानों के जीवन में आर्थिक सुरक्षा व सम्मानजनक स्थिति स्थापित करेगा, बल्कि भारतीय न्यायिक इतिहास में “एक समान कार्य, एक समान वेतन” के सिद्धांत को पुनः सर्वोच्च स्तर पर स्थापित करने वाले मील का पत्थर (landmark judgment) के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।

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